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लॉकडाउन में गांजा तस्करी के लिए 30 घंटे में उड़ीसा से अलीगढ़ पहुंचाया ट्रक

Sun, 26 Apr 2020 03:14 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
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गांजे के साथ आरोपी गिरफ्तार - फोटो : अमर उजाला
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लॉकडाउन हो या सामान्य दिन। ये तस्कर तब भी ऐसे ही माल ला रहे थे। इन दिनों में भी इनका कारोबार ऐसे ही चल रहा था। इनकी मॉडस अपरेंडी जब पुलिस के सामने आई तो सभी हैरान रह गए। उड़ीसा से ट्रक दोनों ड्राइवरों ने मिलकर तीस घंटे में यहां पहुंचा दिया। ट्रक के ड्राइवर केबिन और कंटेनर के बीच में इन्होंने एक तहखाना बनाया, जिसे स्कीम नाम दिया गया। इसका दरवाजा कंटेनर के नीचे टायरों के पास खुलता है, जिसे बाकायदा एक बॉडी निर्माता से तैयार कराया गया। दरवाजा भी नट बोल्ट से चादर से कसा जाता है। जिसमें आसानी से एक व्यक्ति एक बार में प्रवेश कर जाता है। जब चेकिंग हो तो दरवाजे पर नट-बोल्ट से कसी लोहे की प्लेट पर कोई शक भी नहीं कर सकता। पीछे से कंटेनर को देखेंगे तो वह खाली दिखेगा।

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हवाला से भुगतान
एसपी सिटी अभिषेक के अनुसार पूछताछ में इन्होंने स्वीकारा कि इस कारोबार में मुख्य सरगना फरार विपिन शर्मा, गिरफ्तार शिशुपाल व लोकेश हैं। लोकेश व विपिन पहले से इस धंधे में हैं। पूर्व में यह लोग लखनऊ रैकेट से जुड़े थे। उस रैकेट को एसटीएफ ने गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद इन लोगों ने इस कारोबार के कैरियर रिंकू की मदद से सीधे कारोबार शुरू कर दिया। पूछताछ में बताया कि जितना माल मंगाना है, उसकी एडवांस बुकिंग होती है और एकाउंट व हवाला के जरिये उड़ीसा के सप्लायर को 2500 रुपये किलो के हिसाब से माल की कीमत की आधी रकम एडवांस पहुंचानी होती है। फिर वह माल मंगाने के लिए बुलाता है। माल बिकने के बाद शेष रकम पहुंचानी होती है।

ऐसे आता वहां से माल और होती सप्लाई
गिरफ्तार तस्करों ने स्वीकारा कि अब तक वे छोटी गाड़ियों में भी टायरों के आसपास इसी तरह के तहखाने बनवाकर माल लेकर आते थे। अब उनके माल की डिमांड अलीगढ़ व हाथरस में बढ़ गई है। इसके लिए उन्होंने यह कंटेनर तैयार कराया था। दो ड्राइवरों को दो नए नंबर व मोबाइल लेकर रिंकू अपने साथ यहां से लेकर जाता था। जाते समय भी ट्रक खाली होता और रास्ते में कोई पूछे तो बता दिया जाता कि आलू खाली करके जा रहे हैं। उनके पास एक फर्जी आलू आढ़त का पास होता था। वापसी में वह कंटेनर के पीछे हिस्से में रंग व नंबर प्लेट बदलवा लेते और फिर खाली कंटेनर इसी तरह वापस लाते। लौटते में भी बताते कि आलू खाली करके आए हैं। लॉकडाउन में भी इसी तरह आए। इससे पहले एक
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ट्रक माल इसी तरह हाथरस में उतारा गया था।

कारोबार में घाटा होने पर शिशुपाल उतरा इस धंधे में
इस धंधे में अब तक सिर्फ विपिन व लोकेश ही मुख्य तस्कर थे। शिशुपाल दो माह पहले ही इनके साथ रुपये लगाकर शामिल हुआ। उसका उत्तराखंड में अपना कारोबार था, जिसमें घाटा होने के कारण इस धंधे में लालचवश आ गया। बाकी लोग भी क्षेत्र में अपना इंपोर्ट-एक्सपोर्ट का कारोबार बताकर रौब गालिब करते हैं।

यह भी मॉडस अपरेंडी का हिस्सा
एक तो ड्राइवरों को एक ट्रिप के 50-50 हजार रुपये व एक-एक किलो गांजा दिया जाता। दूसरा जिले की सीमा में आने के बाद वह किसी होटल पर गाड़ी छोड़कर चले आते थे। वहां दूसरे ड्राइवर उसे लेकर आते थे। जिले की सीमा में आने पर एक बाइक इस ट्रक को स्कार्ट करके मौके पर लेकर जाती। जहां माल खाली होता। स्कार्ट वाहन करीब तीन चार किमी आगे चलता, ताकि कहीं कोई चेकिंग आदि हो तो रास्ता बदल दिया जाए।
-जिला स्तर पर इतने बड़े पैमाने पर गांजा या नशीले पदार्थ की तस्करी लंबे अर्से बाद पकड़ी गई है। यह टीम की बड़ी सफलता है। टीम को 25 हजार रुपये के नकद इनाम के साथ प्रशस्ती पत्र दिया गया है। बाकी सम्मान के लिए डीजीपी महोदय को भी संस्तुति की जा रही है।
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-मुनिराज जी एसएसपी

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