हादसे में मृत टेंपो चालक यामीन के परिजनों ने बताया कि वह बुढ़ासी से हरदुआगंज और क्वार्सी तक टेंपो चलाकर परिवार की आजीविका चला रहा था। बुधवार को गांव के युवकों ने टप्पल में काम खत्म करके वापस लौटकर आने का यामीन ने 15 सौ रुपये में आने-जाने का भाड़ा तय कर लिया था।
बुकिंग का हवाला देकर नहीं माना यामीन
गांव के अरमान, असद और मोनिस ने परिजनों को बताया कि रात दो बजे करीब काम खत्म हुआ तो सभी ने चलने की तैयारी कर ली, लेकिन जब मकान स्वामी ने आधी रात में निकलने से मना कर रुकने के लिए रजाई गद्दे देने को कहा तो चारों ने रुकने का मन बना लिया, लेकिन टेंपो चालक यामीन नहीं माना, बोला कि सुबह का उसके पास भाड़ा है, इसलिए वह नहीं रुक सकता, जिसके बाद पांचों चल दिए।
मृतक अलीम अहमद के बड़े भाई मोनिस ने बताया कि सड़क के एक ही तरफ से आने-जाने वाले वाहन गुजर रहे थे, वह और अरमान आग जलाकर ताप रहे थे, इसी बीच तेज रफ्तार ट्रक टेंपो को टक्कर मारकर भाग गया, उन्होंने पीछे मुड़कर देखा तो काफी दूर छोटा भाई अलीम और यामीन सड़क पर पड़े थे जबकि सदफ उठकर खड़ा हुआ तो उसके सिर से खून टपक रहा था, टेंपो काफी दूर तक चला गया था, यामीन का चेहरा कुचल गया था, छोटे भाई अलीम का पैर कुचल गया था, जिससे ख़ून बह रहा था।
प्रशासन से आर्थिक मदद की मांग
ग्रामीणों ने बताया कि यामीन की आजीविका का टेंपो ही एकमात्र सहारा था, परिवार को ढांढस बंधाने के लिए लोग जब यामीन के घर पहुंचे तो दरवाजे पर किवाड़ तक न थी। पर्दे को हो दरवाजा बनाकर काम चल रहा था। एक बेटी और तीन बेटों हमजा, हुसैन व अली में सबसे बड़ा बेटा 10 वर्ष का है। वहीं दूसरा मृतक अलीम चार भाइयों में सबसे छोटा था। भाजपा युवा नेता सुधीर शर्मा व ग्राम प्रधान हुस्नबानो में प्रशासन से दोनों मृतकों के परिजनों को आर्थिक मदद दिलाने की गुहार लगाई है।