माौत का मंजर जिनकी आंखों के सामने से गुजर गया हो, वह क्या कुछ बोल पाएंगे। ऐसा ही कुछ इस दुर्घटना में घायल मासूमों व बड़ों के सामने हुआ है। दुर्घटना में दर्जन भर से ज्यादा घायल 2 साल से लेकर 10 साल तक के बच्चे हैं। जो कुछ भी बता पाने या बोलने के बजाए कांपे जा रहे हैं। उनके शरीर में चोटें कम हैं।
या तो पेट में पानी है या फिर वह इस कदर दहशत में हैं कि दुर्घटनास्थल से जिला मुख्यालय तक आने के बाद भी उस दहशत से उबर नहीं पा रहे। बात उन्हें संभालने वालों की करें तो यहां आए 21 के करीब घायलों की तीमारदारी में मात्र एक महिला रेखा और एक युवक है।
रेखा की मानें तो वह बड़ागांव की है और ट्रैक्टर मालिक/चालक सुनील उनका रिश्तेदार है। सुनील के परिवार की बच्चियां शिवानी, शिखा आदि नवदुर्गा व्रत रही थीं। उन्हीं ने कर्णवास-बेलौन की जात कराने के लिए कहा था। उन्हीं के कहने पर सुनील ने ट्रैक्टर से रिश्तेदारों को चलने का आमंत्रण दिया तो सभी तैयार हो गए। मगर ऐसा न पता था कि यह सब हो जाएगा।