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जुकाम, बुखार को कोरोना समझें, पर न लें स्टेरॉयड

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जिले में कोरोना के मामलों से बन रही भयावह स्थिति से संभला जा सकता है। इसके लिए हर व्यक्ति में जागरूकता होनी चाहिए। लापरवाही से बचेंगे तो निश्चित ही जीवन को बचा लेंगे। सर्दी, जुकाम, बुखार जैसे लक्षणों को कोरोना मानकर दवाओं का सेवन शुरू करें।
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जल्द सीटी स्कैन व स्टेरॉयड की आवश्यकता नहीं है। खुद क्लीनिकल ट्रायल न करें। बल्कि इलाज की प्रक्रिया को समझें, क्योंकि लापरवाही से तो जानकारी ही बचाव है। यह कहना है शेखर सराफ मेमोरियल हास्पिटल (रूसा) के फिजिशियन व आईएमए के सदस्य डॉ. अतुल सिंघल का।
डॉ. अतुल सिंघल ने कहा कि कोरोना की वजह से लगातार हालात बिगड़ते जा रहे हैं। सर्दी, जुकाम, बुखार जैसे लक्षण होते हैं तो सबसे पहले यही सोचना है कि यह कोरोना तो नहीं है। देखा जा रहा कि पहले दूसरे दिन बुखार आ रहा है। हल्का सा जुकाम, खांसी, कमजोरी हुई, लेकिन हम लोग बिना दवा के काम करते रहते हैं। थोड़ी समस्या बढ़ने पर लोग स्टेरॉयड का सेवन करते हैं तो यह बीमारी को जड़ से खत्म नहीं करता है।
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बल्कि दबा देता है, इसका एक नुकसान यह भी है कि स्टेरॉयड की वजह से लक्षण गायब हो जाते हैं, जो पकड़ में नहीं आते हैं। स्टेरॉयड से आराम तो मिलता है, लेकिन शरीर से बीमारी नहीं जाती है। बल्कि वायरस को फलने फूलने का मौका मिलता है। इसीलिए कोई भी लक्षण होने पर पहले दिन से आईएमए और सरकार के निर्देशानुसार दवाएं लेना शुरू कर दें।
डरे नहीं, न ही हल्के में लेना है, सर्दी, जुकाम को सबसे पहले कोरोना ही समझें और जांच कराएं। सही इलाज सही समय से शुरू हो जाना चाहिए। अगर सीटी स्कैन कराना है तो डॉक्टर पांचवें या छठवें दिन सलाह देते हैं। दवाओं से बुखार ठीक नहीं हो रहा है तो डॉक्टर की सलाह पर इलाज शुरू कराएं। रेमडिसिविर दवा ज्यादा प्रभावशाली नहीं है।
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