यात्रियों को रेलवे में सफर करने पर सुखद अनुभूति तभी होगी जब भारतीय रेलवे का विकास होगा। इसलिए भारत सरकार के रेलवे सलाहकार समिति सदस्य रहकर रेलवे को सुधारने के लिए विशाल दिलीप भुजबल यात्रीओं के लिए आशावाद बने हैं।
विशाल दिलीप भुजबल ने कहा कि लोग टिकट लेकर रेल से यात्रा करते हैं, इसके बावजूद देखा जाता है कि उनको रेलवे स्टेशन पर पर्याप्त सुविधा नहीं मिलती। पानी, सुरक्षा और अच्छा खाना इन चीजों का आज भी कई स्टेशनों पर अभाव है। इसके बावजूद यदि समस्यओं का हल निकालने और प्रशासन से बात की जाए तो इसका हल निकाला जा सकता है। उन्होंने कहा कि रेलवे सलाहकार समिति पर सदस्य के रूप में चुने जाने पर मेरा कर्तव्य बनता है कि मैं रेलवे के विकास और यात्रीयों को सुखद यात्रा की अनुभूति प्रदान करने में अहम भूमिका निभाऊं।
राष्ट्रीय यूथ आयकॉन 2020 से सम्मानित किए गए विशाल दिलीप भुजबल रेलवे का विकास करने की नई सोंच रखते हैं। बता दें कि उनके पास सामाजिक क्षेत्र में काम करने का बड़ा अनुभव है जो लोगों की भावना को समझने में उनकी मदद करता है। उनके निस्वार्थ और कड़ी मेहनत के कारण ही उन्हें भारतीय रेलवे के दक्षिण पूर्व रेलवे की चक्रधरपुर मंडल रेल सलाहकार समिति में सदस्य के तौर पर चुना गया है।
उन्होने कहा कि भारतीय रेलवे को ग्लोबल स्तर पर बदलने के लिए कुछ परियोजनाओं के तहत बदलाव करना जरूरी है। इस बदलाव में तकनीकी सुधार होना चाहिए, अभी खनिज संपत्ति भी कम हो रही है, इसलिए ज्यादातर स्टेशनों पर सोलर एनर्जी का इस्तमाल होना, स्टेशन पर उत्पन्न होने वाले कुड़े से अच्छे खाद की निर्माण, बारिश का पानी इकट्ठा कर उसको दूसरे काम में उपयोग करने के लिए स्टेशन पर रेन वॉटर हार्वेस्टिंग करना, रेलवे को अधिकाधिक लोकाभिमुख बनाना और पैसेंजर फ्रेंडली स्टेशन बनाना जरूरी है। आज स्टेशन पर बिकने वाले खाद्य पदार्थ का अच्छा होना और स्टेशन की सुरक्षा कड़ी करना बेहद जरूरी हो गया है। ऐसे में यह सदस्यों की जिम्मेदारी है कि वे नीतिगत निर्णय लेने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों और रेलवे के सदस्यों की नीति बैठकों में भाग लें, नई रेलवे परियोजनाओं की मांग करें और रेल यात्रियों की सुविधा पर ध्यान दें।
विशाल भुजबल समिति सदस्य के पदपर रहकर रेल को आत्मनिर्भर बनाने के लिए वचनबद्ध हैं और रेल को ग्लोबल स्तर पर अनुरूप बनाने के लिए नई सोंच से कुछ बदलाव करने की कोशिश कर रहे हैं। रेलवे के विकास में एक जबाबदेही भूमिका निभानी होगी।
रेलवे के विकास के लिए कई गैर-सरकारी स्वयंसेवी संस्थाओं की मदद लेने के लिए उनको भी आकर्षित करने हेतु संवाद के कई द्वार खोलने होंगे। रेलवे को आय के नए मार्ग बढ़ाने के लिए नए उपाय ढूंढ़ने होंगे।