12 दिसंबर को जब अमर उजाला की टीम हाथरस हादसे के बाद अलीगढ़ महानगर की ट्रैफिक व्यवस्था को देखने निकली तो कदम-कदम पर नियम टूटते देखे गए। मूक दर्शन बनी थी यातायात पुलिस।
अलीगढ़ में पुलिस चौकी और थानों के आसपास ही यातायात के नियम टूट रहे हैं। 12 दिसंबर की दोपहर को गांधी पार्क थाने के सामने से एक मैजिक वाहन गुजरता है जिसके पीछे लोग लटके हुए थे। लेकिन इसे न किसी ने रोका और न ही टोका। एक ऑटो यहां से गुजरा जिसमें क्षमता से अधिक सवारियां थीं। वह भी यातायात के नियमों को रौंदते हुए निकल गया। जिक्र केवल इन्हीं वाहनों का नहीं बल्कि 12 दिसंबर को जब अमर उजाला की टीम हाथरस हादसे के बाद अलीगढ़ महानगर की ट्रैफिक व्यवस्था को देखने निकली तो कदम-कदम पर नियम टूटते देखे गए। मूक दर्शन बनी थी यातायात पुलिस।
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एटा चुंगी चौराहा
यहां कई मालवाहक सवारियों ढो रहे थे। ऑटो के पीछे लोग लटके हुए थे। यह सब तब हो रहा था जब चौराहे पर ट्रैफिक पुलिस का सिपाही मुस्तैद था। अब ऐसा भी नहीं कि उसे कुछ नजर न आ रहा हो। लेकिन खामोश बना रहा। कई दूसरे वाहन यहां से यातायात के नियमों को कुचलते हुए आगे बढ़ गए।
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क्वार्सी चौराहा
दोपहर के वक्त यहां भी टाटा मैजिक, ऑटो और लोडर वाहन सवारियां लेकर निकल रहे थे। मैजिक पर भीतर तो क्षमता से ज्यादा सवारियां थीं हीं पीछे भी लोग लटके हुए थे। लेकिन चौराहे पर मौजूद पुलिस कर्मियों ने इन्हें रोकने की कोशिश नहीं की। अगर टोक ही देते तो यह शायद आगे को इस तरह सवारियां न भरते।
सारसौल चौराहा
भीड़भाड़ वाले इस चौराहे पर भी ट्रैफिक पुलिस के लोग तैनात थे। लेकिन डग्गामार वाहन यहां भी सवारियां भर रहे थे। ऑटो में क्षमता से ज्यादा सवारियां भरी हुईं थीं। स्थिति यह थी कि चालक ने अपनी सीट भी सवारी को दे दे थी और वह किसी तरह से बैठकर ऑटो चला रहा था। स्थिति यह थी कि अगर ऑटो बेकाबू हो जाता तो कंट्रोल करना भी मुश्किल था।