चौराहे पर खड़े ट्रैफिक पुलिस वालों के सामने ही नियम टूटते रहते हैं। न तो कभी डग्गामार वाहनों के खिलाफ अभियान चलाया जाता है और न ही क्षमता से अधिक सवारी बैठाकर दौड़ने वाले वाहनों का चालान होता है।
कभी यातायात माह तो कभी यातायात सुरक्षा सप्ताह। यूं कहिए कि हर महीने लोगों को जागरूक करने के लिए पुलिस अभियान चलाती रहती है। लेकिन हालात फिर भी बिगड़ते जा रहे हैं। इसकी वजह भी खुद पुलिस वाले ही हैं। जो नियम बनाए जाते हैं उनका पालन करा ही नहीं पाते। चौराहे पर खड़े ट्रैफिक पुलिस वालों के सामने ही नियम टूटते रहते हैं। न तो कभी डग्गामार वाहनों के खिलाफ अभियान चलाया जाता है और न ही क्षमता से अधिक सवारी बैठाकर दौड़ने वाले वाहनों का चालान होता है।
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ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार के लिए ट्रैफिक पुलिस की लंबी चौड़ी फौज है। किसी भी चौराहे पर जाकर देख लीजिए वहां सिपाही मौजूद होते ही हैं। लेकिन यह पूरा दिन मूकदर्शक ही रहते हैं। इनके सामने से एक बाइक पर तीन लोग सवार होकर निकल जाते हैं। टाटा मैजिक पर पीछे लटकर लोग सफर कर रहे होते हैं। बसों की छतों पर बैठे लोग नजर आ जाते हैं। मगर इनके द्वारा कभी कार्रवाई नहीं की जाती है। अब वजह चाहें जो भी हो लेकिन इससे सफर पर खतरा जरूर मंडराता रहता है।
शहर में डग्गामार वाहनों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। हर रोज अलग अलग मार्गों पर चेकिंग की जा रही है। इस अभियान को और तेज किया जाएगा।-मुकेश चंद्र उत्तम,एसपी ट्रैफिक
हाथरस हादसे के बाद भी नहीं टूट रही खामोशी
हाथरस हादसे में आठ लोगों की मौत के बाद भी पुलिस और प्रशासनिक अफसरों की नींद नहीं टूट रही है। अभी तक एक भी दिन अभियान नहीं चलाया गया है। जबकि पिछले दिनों ही शासन से ही डग्गामार वाहनों के खिलाफ अभियान चलाने का आदेश जारी हुआ था। मगर अधिकारियों ने उस पर भी कोई ध्यान नहीं दिया है।