ज्यादातर ट्रैक्टर ट्रॉली बिना परिवहन विभाग में रजिस्ट्रेशन कराए चल रहे हैं। परिवहन विभाग में दर्ज आंकड़ों के मुताबिक कागजों में यह ट्रैक्टर-ट्राली कृषि कार्य के लिए हैं, लेकिन इनका ज्यादातर इस्तेमाल सड़कों पर माल ढोने में किया जा रहा है।
बुलंदशहर के अरनिया में हुआ हादसे का स्थल अलीगढ़ कसे 35 किमी दूर था। इस खबर पर यहां भी शोर मचा। पुलिस-प्रशासन सतर्क हुआ। घायलों को उपचार के लिए जेएन मेडिकल कॉलेज लाया यगा। इसके बाबजूद 25 अगस्त को अलीगढ़ शहर के आसपास प्रमुख मार्गों पर ट्रैक्टर-ट्रॉली सवारियां लेकर घूमते नजर आईं।
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शहर में और हाईवे पर सड़कों पर दौड़ते कृषि और व्यावसायिक ट्रैक्टर-ट्रॉली में रिफ्लेक्टर नहीं लगे होते हैं। ट्रॉलियों में बैक लाइट न होने से रात में पीछे चलने वाले लोगों के साथ हादसे की संभावना बनी रहती है, जिसके चलते सड़क पर अंधेरे में मौजूद यह ट्रॉलियां सडक़ दुर्घटना का कारण बन रही हैं। ज्यादातर ट्रैक्टर ट्रॉली बिना परिवहन विभाग में रजिस्ट्रेशन कराए चल रहे हैं। परिवहन विभाग में दर्ज आंकड़ों के मुताबिक कागजों में यह ट्रैक्टर-ट्राली कृषि कार्य के लिए हैं, लेकिन इनका ज्यादातर इस्तेमाल सड़कों पर माल ढोने में किया जा रहा है।
राजस्व चोरी करने वाले ट्रैक्टर स्वामियों की जांच के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। पकड़े जाने पर उनके विरुद्ध नियमानुकूल कार्रवाई करते हुए अर्थदंड लगाया जाएगा। जिले में लगातार अभियान चलाकर वाहनों की जांच की जा रही है।- दीपक शाह, आरटीओ प्रशासन