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होलिका दहन आजः शाम 06.45 बजे से रात 10.57 तक है मुहुर्त

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मास्क वाला होली मिलन समारोह- मथुरा रोड स्थित चंद्र गार्डन में शनिवार को होली मिलन समारोह कार्यक् - फोटो : CITY OFFICE
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आज सुबह 06.45 बजे से लेकर सोमवार तड़के 5.45 बजे तक होलिका स्थापना से लेकर दहन तक के लिए विभिन्न मुहूर्त हैं। गली-मोहल्ले और चौराहों के लिए अलहदा और घर पर निभाई जाने वाली परंपरा के लिए अलग से विशेष मुहूर्त उपलब्ध हैं। ज्योतिष गणना के अनुसार, इन शुभ मुहूर्तों में होलिका स्थापना और दहन सुख, शांति और समृद्धि के लिए सर्वोत्तम रहेगा।
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श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान के अध्यक्ष पं. हृदय रंजन शर्मा ने बताया कि रविवार को उत्तरा फाल्गुनी-हस्त नक्षत्र, वृद्धि योग, विष्टि करण के शुभ संयोग में होली का पर्व होलिका दहन मान्य रहेगा। इस दिन पूर्णिमा रात्रि 12:17 बजे तक मान्य रहेगी। गली-मोहल्ले और चौराहों पर होलिका स्थापना का शुभ समय रविवार सुबह 06:45 से 09:35 बजे तक है।
विश्व प्रसिद्ध चौघड़िया मुहूर्त अनुसार, लाभ और अमृत के दो चौघड़िया मुहूर्त रहेंगे, जिसमें होलिका की स्थापना करना अत्यंत महत्वपूर्ण एवं शुभ माना जाता है। इसके बाद घरों में रखी जाने वाली होलिका के लिए सुबह 8:00 से 12.25 बजे तक लाभ, अमृत और चर के तीन चौघड़िया मुहूर्त मिलेंगे। जो सभी कार्यों के लिए शुभ फलदायक रहेंगे। घरेलू लोगों के लिए पूजा का सर्वश्रेष्ठ समय दोपहर 2:10 से दोपहर 3:25 बजे तक रहेगा।
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होलिका दहन के लिए रविवार शाम 06:35 बजे से रात्रि 10:57 बजे तक शुभ, अमृत और चर के तीन मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे। घर की होली जलाने का सबसे उपयुक्त समय रविवार-सोमवार रात्रि 3:35 बजे से सुबह 05:45 तक शुभ लाभ और उद्देग के तीन मुहूर्त हैं। होली जलाने के लिए यह समय सुख, शांति और समृद्धि के लिए सर्वोत्तम रहेगा।
होलिका पूजन विधि
पं. हृदय रंजन शर्मा ने बताया कि एक थाली में एक लोटा पानी, कच्चा सूत, हल्दी, चावल, थोड़ा सा आटा, गुड़, दाल, घी, आठ पूरी हलवा, गुझिया, दीपक, गुलरियों की माला, रुपया, नमक की डेली से होलिका पूजन करते हैं। इसके बाद भोजन किया जाता है। फिर अपने घर के आंगन में होलिका की स्थापना की जाती है।
उन्होंने बताया कि आटे व गुलाल का चौक बनाकर उसके ऊपर गुलरियों की माला रखें। मालायें बड़े से छोटे क्रम में रखी जाती हैं। परिवार के लोगों के हिसाब से जौ की बालियों की गड्डियां बनाते हैं। चौराहे की सामूहिक होलिका दहन के बाद उसकी आग से घर की होलिका जलाते हैं। पूजन करते समय होलिका माता की परिक्रमा लगाते हैं। जिन घरों में पुत्र की शादी हुई हो या पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई हो, उन घरों में मंगल गीत गाए जाते हैं।
सोमवार को खोली जाएगी धूल होली
रविवार को होलिका दहन के बाद अगले दिन धूल होली का रिवाज है। इस दिन पूरे जिले में रंग, गुलाल से होली खेली जाएगी। घरों में सुबह सुबह पकवान बनाकर मिलने आने वाले रिश्तेदारों, दोस्तों, परिजनों के साथ खाते हैं। प्रेम और सौहार्द की मिसाल देते हुए एक दूसरे को होली की शुभकामनाएं देने का रिवाज सुबह से ही शुरू हो जाएगा।

पं. हृदय रंजन शर्मा- फोटो : CITY OFFICE

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