To protect young son on the forehead rate tech father
- फोटो : Amar Ujala
खैर तहसील के टप्पल ब्लॉक के गांव सूरजमल के किसान ओंकार सिंह अपने 20 वर्षीय बेटे अमित की जान बचाने के लिए हर दर का चक्कर लगा रहे हैं। अमित की दोनों किडनी खराब हैं, उसे तत्काल किडनी की जरूरत है। उसकी मां रवींद्री देवी की किडनी और ब्लड ग्रुप उससे मैच हो गया है, लेकिन साढ़े आठ लाख रुपये का खर्च वहन करने में अक्षम आेंकार सिंह दर-दर मदद के लिए भटक रहे हैं। किडनी खराब होने का पता अमित को उस वक्त हुआ जब वह फौज की खुली भर्ती में शामिल हुआ।
वहां दौड़ लगाने पर डाक्टरों ने देखा कि अमित का ब्लडप्रेशर अचानक बहुत बढ़ गया है। इसीलिए उसको वहां सलाह दी गई कि वह अपना इलाज कराएं। अमित ने भर्ती से लौट कर अपना मेडिकल चेकअप कराया तो पता चला कि उसकी किडनी खराब हैं। उसने इलाज शुरू करा दिया, लेकिन किडनी में ज्यादा समस्या होने के कारण कोई फायदा नहीं हुआ।
इस बीच ओंकार सिंह का उनके ही पांच भाइयों में बंटवारा हो गया। ओंकार सिंह के हिस्से में गांव के मकान का घेर और दस बीघा की खेती ही आई। इस खेती से घर का गुजारा होता है। महंगे इलाज के कारण ही खेती पर बने किसान क्रेडिट कार्ड पर 5 लाख का कर्ज भी हो गया है। घेर में गुजारा नहीं हुआ तो ओंकार के बड़े भाई प्रेमपाल ने अपना एक कमरा रहने के लिए दे दिया। पैसों की तंगी बढ़ी तो अमित के छोटे भाई सुमित को उसके ताऊ के पास दिल्ली भेजा गया, जहां वह इंटरमीडिएट का छात्र है।
हफ्ते में दो बार डायलिसिस में साढ़े तीन हजार रुपये और महीने कुल दवाआें का खर्च लगभग 30 हजार रुपये तक पहुंच जाता है। ओंकार सिंह ने बताया कि खैर के तत्काल विधायक भगवती प्रसाद सूर्यवंशी के माध्यम से उत्तर प्रदेश सरकार और सांसद सतीश गौतम के माध्यम से प्रधानमंत्री कार्यालय से आर्थिक मदद मांगी, लेकिन कोई फायदा नहीं मिला। अमित की मां रवींद्री देवी किडनी देने के लिए तैयार हैं। मां-बेटे का ब्लड ग्रुप और दूसरे टेस्ट हो चुके हैं। सब कुछ मिलान करने के बाद डाक्टरों ने भी इस प्रत्यारोपण को हरी झंडी दे दी है।