इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की महिला शाखा के मिशन पिंक हेल्थ के बैनरतले शनिवार को विजडम स्कूल में मधुमेह पर कार्यशाला का आयोजन किया। जिसमें छात्र-छात्राओं को विशेषज्ञ डॉ.विकास मेहरोत्रा ने मोटापा और मधुमेह से बचने के उपाय बताए गए। इस दौरान बताया गया कि स्वस्थ भोजन की थाली और योगा करने से मधुमेह से मुक्ति पाई जा सकती है।
डॉ. विकास मेहरोत्रा ने बताया कि मोटापे और मधुमेह के मामले में हिंदुस्तान दुनिया में नंबर तीन पर आ गया है। चाइना के बाद दूसरा नंबर है। युवा टाइप टू डायबिटीज (मधुमेह) की शुरुआत 15 साल से पहले हो जाती है। जो भारत के मधुमेह रोगियों में 15 प्रतिशत है। विश्व का हर पांचवां टाइप बन डायबिटिक भारतीय है।
अर्बन भारतीयों में डायबिटिक की जागरूकता 25 प्रतिशत लोगों में हैं। इस दौरान बताया कि शहर के स्कूल में सर्वे किया गया तो सामने आया कि 70 प्रतिशत बच्चे मोटापे से ग्रस्त हैं। ये सर्वे कोरोना से पहले हुआ था। कोरोना काल के बाद स्थिति और बिगड़ने लगी है। क्योंकि कोरोना काल में खेल के मैदान, स्कूल आदि बंद हो गए थे।
खाना-पीना अनियंत्रित हो गया था। तीन प्रतिशत बच्चे ब्लड प्रेशर के शिकार मिले। स्कूलों के जरिए मधुमेह बीमारी पर काबू पाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि पैकेट में आने वाला खाना नहीं खाना है। जो घर में बने, सिर्फ उसे ही खाना है। डॉ. नमिता भारद्वाज ने छात्राओं को बताया कि वजन बढ़ेगा तो शरीर के हार्मोंस में विकार पैदा होंगे। जिससे आगे चलकर पीसीओडी की समस्या हो सकती है। ऐसे में युवतियों को डायटिंग नहीं करनी चाहिए। इसकी जगह स्वस्थ खाना खाना चाहिए। इस मौके पर डॉ. अल्पना वार्ष्णेय, डॉ. नीति गोयल, डायरेक्टर प्रीति गुप्ता, प्रमोद कुमार, प्रिंसिपल अग्रवाल का सहयोग रहा।