जेएन मेडिकल कॉलेज के बाहर अवैध एंबुलेंस का कारोबार चला रहे कुख्यात अपराधी अकरम टिप्पा के भाइयों असलम-अशरफ पर पुलिस सख्ती के बाद उनकी कारगुजारियां सामने आने लगी हैं। लोग दबी जुबां से कह रहे हैं कि अब तक पुलिस की शह पर पनपे इन दोनों भाइयों के सामने कोई बोलता नहीं था और पुलिस स्तर से सुनवाई न होने के कारण पीड़ित भी अपने घर चुपचाप लौट जाते थे। मगर 25 मई को मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस के पास तीन शिकायतें शपथ पत्र के साथ पहुंची हैं, जिनमें इन दोनों भाइयों द्वारा किए गए उत्पीड़न की दास्तां बताई गई है। पुलिस इन शपथ पत्रों को मुकदमे में शामिल करने की तैयारी में है।
2019/20 में इस अवैध कारोबार में पड़ी वर्चस्व की नींव
जेएन मेडिकल कॉलेज के बाहर एंबुलेंसों का जमावड़ा रहता है। इस कारोबार में वर्चस्व की नींव तीन वर्ष पहले पड़ी। 2019/20 में एक सपा नेता ने खुद का अस्पताल बनाया और खुद की एंबुलेंस लगाकर यहां से मरीजों को अपने अस्पताल में ले जाना शुरू कर दिया। सपा नेता ने अन्य एंबुलेंस संचालकों को डराना धमकाना शुरू कर दिया। झगड़े हुए और सपा नेता को जेल जाना पड़ा। बस सपा नेता के जेल जाते ही अकरम टिप्पा की एंट्री हुई। उसने अपने भाइयों को यहां स्थापित किया और अवैध एंबुलेंस माफिया के रूप में कारोबार शुरू कर दिया। देखते ही देखते इन भाइयों ने अपना अस्पताल बना लिया। आज इनके पास 16 एंबुलेंस हैं। कहा जाता है कि कुछ वर्ष पहले तक एक पुलिस अधिकारी इन्हें शरण देते थे। अकरम उस पुलिस अधिकारी के लिए मुखबिरी करता था। इसके बदले में यह कारोबार पनपता गया।
आरटीओ ने दिया एंबुलेंस संचालकों को 10 जून तक का नोटिस
इस घटना के सुर्खियों में आने के बाद एएमयू प्रशासन व आरटीओ भी सक्रिय हो गया है। दोनों की ओर से मेडिकल कॉलेज के बाहर खड़ी रहने वाली एंबुलेंसों की जांच पड़ताल कर चेतावनी दी गई है। दस जून तक सभी अपने दस्तावेजों की जांच करा लें। अगर इसके बाद उनके प्रपत्र पूरे नहीं पाए गए तो उनकी एंबुलेंस का संचालन नहीं होने दिया जाएगा। इसी तरह एएमयू प्रशासन ने भी पंजीकरण के तहत टोकन सिस्टम में चल रही एंबुलेंसों के दस्तावेजों की जांच के लिए कहा है।
- हम लगातार इस अवैध कारोबार पर नजर बनाए हुए हैं। किसी तरह की गुंडई नहीं होने दी जाएगी। इन दोनों भाइयों के कारोबार को माफिया के रूप में चिह्नित करने की तैयारी है, जो भी शपथ पत्र आ रहे हैं, उन्हें मुकदमे में शामिल किया जा रहा है। दोनों की गिरफ्तारी के प्रयास भी जारी हैं। - श्वेताभ पांडेय, सीओ तृतीय
- इस मामले में अब तक साफ है कि ये लोग मेडिकल कॉलेज के बाहर ही घूमते रहते हैं और मरीजों को जबरन अपने अस्पताल में या कमीशन के लिए दूसरे अस्पताल में ले जाते थे। जहां उनसे अवैध धन वसूली होती थी। अब मुकदमा दर्ज कराया गया है। मामले में पुलिस को इनकी गिरफ्तारी के लिए 72 घंटे का समय है। अगर गिरफ्तारी नहीं हुई तो एसएसपी दफ्तर पर धरना देंगे। - दीपक शर्मा आजाद, वादी मुकदमा
शपथ पत्र ये आईं शिकायतें
1- पुराने शहर के गोविंद नगर तकिया मोहल्ला के नवाब कुरैशी ने पुलिस को दिए शपथ पत्र में कहा कि 19 मई को वह अपनी बेटी तबस्सुम को पथरी की शिकायत पर जेएन मेडिकल कॉलेज ले गए, जहां असलम-अशरफ उन्हें जबरन अपने साथ लांग लाइफ अस्पताल ले गए। वहां दो दिन तक कोई उपचार नहीं हुआ, जबकि 35 हजार रुपये छीन लिए। उसने विरोध दर्ज कराया तो धमकी दी। किसी तरह 21 मई को वह अपनी बेटी को वहां से लेकर आए तो उसे तरह-तरह की धमकियां मिलीं।
2- पालीमुकीमपुर अतरौली के संतोष शर्मा ने पुलिस को दिए शपथ पत्र में कहा कि 10 मई को उनके परिचित गहतौली के जगत सिंह दुर्घटना में जख्मी हो गए। उनके परिजनों के साथ खुद संतोष, जगत सिंह को जेएन मेडिकल कॉलेज लेकर गए। नाजुक हालत में दिल्ली ले जाने का विचार चल रहा था। इसी असलम-अशरफ उन्हें जबरन अपने साथ लांग लाइफ अस्पताल ले गए। जहां 35 हजार रुपये वसूले गए और किसी सक्षम डॉक्टर से इलाज न मिलने के कारण जगत सिंह की मौत हो गई।
3- सासनी गेट लोधी विहार के नीरज भारद्वाज ने पुलिस को दिए शपत्र पत्र में कहा कि 15 मई को उनके परिचित राजू निवासी एलमपुर ने उन्हें फोन पर बताया कि उनका बेटा 13 मई से लांग लाइफ में भर्ती है। यहां रुपये मांगे जा रहे हैं और बेटे को बंधक जैसी स्थिति में रखा गया है। इस पर नीरज अपने साथियों संग गए तो पता चला कि जन्मजात बीमारी के इलाज के लिए राजू बेटे को मेडिकल कॉलेज ले गए थे। वहां से असलम-अशरफ अपनी एंबुलेंस में उसे यहां ले आए और इलाज नहीं मिल रहा। डरा धमकाकर 50 हजार रुपये मांगे जा रहे हैं। 2500 रुपये जबरन छीन लिए हैं। किसी तरह बच्चे को वहां से निकालकर लाया गया।
ये हैं ताजा घटनाएं
केस 1-
एक बच्चे की हुई मौत
एटा के नगला डुकरिया गोला के नीलेश की पत्नी बबली ने दो जुड़वा बच्चों को एटा के अस्पताल में जन्म दिया था। बच्चों की तबियत बिगड़ने पर उन्हें रामघाट रोड के एक बाल रोग विशेषज्ञ के अस्पताल में लाया जा रहा था। मगर अवैध एंबुलेंस माफिया गैंग के लोगों ने उन्हें बाईपास पर रोक लिया और जबरन लांग लाइफ अस्पताल ले जाने का दबाव डाला। आधा घंटे तक वहां विवाद होता रहा। इस दौरान एक बच्चे की मौत हो गई। इस पर नीलेश ने जब पुलिस बुलाने की धमकी दी तो उसे जाने दिया गया। वह बच्चों को बाल रोग विशेषज्ञ के अस्पताल में लेकर पहुंचा। तब दूसरे बच्चे को बचाया जा सका।
केस 2
2400 रुपये के विवाद में युवक को पीटा
जेएन मेडिकल कॉलेज में इलाज के लिए आई महिला को असलम-अशरफ अपने साथ लांग लाइफ अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां महिला के साथ उसके बेटे का दोस्त अतरौली निवासी सचिन भी था। चंद दवाओं के नाम पर जब 2400 रुपये मांगे, इस पर सचिन ने विरोध जताया तो उसको पीटा गया। सचिन के अनुसार किसी तरह वह महिला को वहां से निकालकर लाया।