यूनियन हॉल में पत्रकारों से वार्ता करते अमुवि छात्र संघ के पदाधिकारी।
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एएमयू छात्र संघ अध्यक्ष फैजुल हसन, वरिष्ठ उपाध्यक्ष नदीम अंसारी और सचिव नबील उस्मानी ने कहा है कि तीन तलाक का मामला नितांत मजहबी है, इसमें किसी भी दखल की कोई जरूरत नहीं है। जहां भी इसका गलत इस्तेमाल हो रहा है।
वहां शिक्षा और मुसलिम धर्म कानून की जानकारी का अभाव है। अगर चार धार्मिक इदारों और उलेमाओं से रायशुमारी कर ली जाए तो मुसलिम खबातिनों को कहीं कोई परेशानी नहीं होगी। इसके लिए जागरूकता और शिक्षा की जरूरत है। छात्र नेता मीडिया के साथ यूनियन हाल में बातचीत कर रहे थे।
छात्र नेताओं ने कहा कि इस मामले में हो रही सियासत गलत है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भारतीय संविधान में विभिन्न धर्म और संस्कृति के लोगों को अपने-अपने रीति रिवाजों के साथ रहने की पूरी आजादी मिली है। इसलिए इसमें अदालतों का दखल नहीं हो सकता। मसलन, कामन सिविल कोर्ट ये भी कह सकता है कि सिख, हिंदू और मुसलमान एक तरह से पूजा करें। ये कैसे माना जा सकता है..?
इसलिए छात्र संघ अभी से इसका विरोध कर रहा है, ताकि भविष्य में कोई दूसरी कोई बात न उठाई जाए। नेताओं ने कहा कि जेएनयू के छात्र नजीब को बरामद कराने के लिए अब सीधे केंद्र सरकार से बात करनी होगी।
देश की तमाम खुफिया एजेंसियां उसको अब तक ढूंढ नहीं पाई हैं। आखिर ऐसा क्यों है..? इसके बाद नेताओं ने कहा कि एक निजी टीवी चैनल पर लगाए गए बैन को सरकार ने अभी स्थगित किया है खत्म नहीं किया है। इसके विरोध में मंगलवार दोपहर को मौलाना आजाद लाइब्रेरी से बाव ए सैयद तक प्रदर्शन मार्च होगा।