यूपी बोर्ड के हाईस्कूल के विज्ञान की परीक्षा में सोमवार को तीन फर्जी परीक्षार्थी पकड़े गए। ये तीनों कागजात में उम्र बदलकर दोबारा परीक्षा दे रहे थे। तीनों ने दलाल के जरिये परीक्षा फार्म भरा था। इस मामले में परीक्षा केंद्र व्यवस्थापकों ने तीनों के खिलाफ थाने में एफआईआर दर्ज करा दी है।
नकल के लिए कुख्यात रहा अतरौली फिर चर्चाओं में है। सोमवार को सुबह की पाली में हाईस्कूल के विज्ञान विषय की परीक्षा में एडीएम वित्त विधान जायसवाल ने सचल दल के साथ निरीक्षण किया। केएमवी इंटर कॉलेज में परीक्षा दे रहे दो परीक्षार्थियों की उम्र को लेकर शक हुआ तो अधिकारियों ने उनसे पूछताछ की। इस पर परीक्षार्थी आकाश पुत्र हरेंद्र निवासी सैदपुर, जिला बुलंदशहर ने बताया कि वह 2017 में हाईस्कूल की परीक्षा पास कर चुका है। इस बार कागजात में उम्र कम दर्शाकर बौहरे खुशीराम शर्मा इंटर कॉलेज, तेवथू से हाईस्कूल का पुन: परीक्षा फॉर्म भरा था।
हरिओम पुत्र राजेंद्र निवासी गाजीपुर थाना बरला ने बताया कि वह 2010 में हाईस्कूल की परीक्षा पास कर चुका है। प्रमाण पत्रों में उम्र बदल कर उसने समुंद्री देवी इंटर कॉलेज गाजीपुर से परीक्षा फॉर्म भरा था। इसके अलावा, रायपुर मुजफता के आर्यन कल्चर एकेडमी इंटर कॉलेज में एडीएम व सेक्टर मजिस्ट्रेट सुशील कुमार गौतम ने अनुज पुत्र धर्मवीर निवासी भुसावली, जिला बुलंदशहर को पकड़ा। अनुज ने बताया कि वह 2014 में हाईस्कूल पास कर चुका है। उसने भी उम्र कम दर्शाकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय इंटर कॉलेज से हाईस्कूल का परीक्षा फॉर्म भरा था। इससे पहले की परीक्षाओं में भी ये तीनों शामिल हो चुके हैं। बुलंदशहर के पकड़े परीक्षार्थियों ने बताया कि उनसे परीक्षा फॉर्म भरने के नाम पर दलाल ने छह हजार रुपये लिए थे। अलीगढ़ के छात्र ने दो हजार रुपये देकर परीक्षा फॉर्म भरा था।
दलालों व निजी विद्यालयों की सांठगांठ से चल रहा खेल
अतरौली। 9वीं कक्षा का पंजीकरण कराने के लिए आठवीं पास होना जरूरी होता है। यहां के निजी विद्यालयों से हाईस्कूल का परीक्षा फॉर्म भरने के लिए आठवीं का रिजल्ट और टीसी होना जरूरी नहीं है। छात्र को बस अपने आधार कार्ड में जन्मतिथि कम करानी होती है। यदि कोई जांच आए तो विद्यालय संचालक ही आठवीं के टीसी और रिजल्ट का इंतजाम कर लेता है। खेल कुछ इस तरह होता है। यदि कोई छात्र पहले परीक्षा पास कर चुका है तो उसे आधार कार्ड में जन्मतिथि में फेरबदल करानी होती है। इसके बाद दलाल अथवा सीधे निजी विद्यालय से संपर्क करके 9वीं का पंजीकरण करवा लेता है। उससे आठवीं पास के रिजल्ट और टीसी कुछ नहीं लिए जाते। यदि कोई शिकायत कर दे तो विद्यालय प्रबंधक ही सांठगांठ करके आठवीं पास के कागज तैयार कर लेते हैं। पूर्व में इस तरह के कई मामले उजागर होते रहे हैं। नकल पर गत वर्षों में अंकुश लगने के चलते पास कराने का ठेका दलाल ले लेते हैं, लेकिन परीक्षा केंद्र पर नकल न होने की स्थिति में उसकी जगह सॉल्वर को बैठाया जाता है। इस तरह के मामले भी पूर्व में खुल चुके हैं।
बिल्डिंग है नहीं, कागजों पर चल रहे हैं विद्यालय
क्षेत्र में तमाम विद्यालय ऐसे हैं, जिनकी बिल्डिंग नहीं है या फिर बिल्डिंग में कोई दूसरा विद्यालय चल रहा है, लेकिन इन विद्यालयों से बोर्ड परीक्षा के संस्थागत फॉर्म बदस्तूर भरे जा रहे हैं। यह आलम तब है जब अधिकारी इन विद्यालयों का भौतिक सत्यापन समय-समय पर करने का दावा करते हैं। अतरौली के केएमवी इंटर कॉलेज में रानी लक्ष्मीबाई हायर सेकेंडरी स्कूल का परीक्षा केंद्र है। इसमें 10 परीक्षार्थी केएमवी में परीक्षा दे रहे हैं। पिछले दिनों तहसील स्तरीय कुछ अधिकारियों ने जब केएमवी सेंटर का निरीक्षण किया था तो यहां एक संदिग्ध परीक्षार्थी मिला। परीक्षार्थी ठीक से जानकारी नहीं दे सका तो अधिकारी इसकी सत्यता की जानकारी करने नरौना 12 नंबर पहुंचे तो वहां उक्त स्कूल के नाम का बोर्ड तो दूर स्कूल तक नहीं मिला। कागजों पर चल रहा यह स्कूल सत्ताधारी पक्ष से जुड़े एक नेता का बताया जाता है।