लोगों का कहना है कि एक पखवाड़े से इस मार्ग से मांस जाने की सूचनाएं मिल रही थीं। दस दिन पहले पुलिस को सूचना देकर यही गाड़ी व यही लोग पकड़वाए थे, लेकिन पुलिस ने सभी को छोड़ दिया था। छोड़ने से पहले हमें नहीं बताया गया। इसी के चलते खुद शनिवार को पुलिस को बिना बताए गाड़ी पकड़ ली। गुस्सा इस बात पर था कि पिछली बार पुलिस ने छोड़ दिया है। इस बार इनको यहीं सबक सिखा दो।
बेरहमी से पीटा गया चारों को...सिर में भी गंभीर चोटें
भीड़ इस कदर गुस्से में थी कि व्यापारियों को बेरहमी के साथ पीट रही थी। बेल्ट, ईंट, लात घूंसे और डंडों से पीटा गया। इनमें एक के सिर में गंभीर चोट व ब्रेन हेमरेज के लक्षण हैं, जबकि दूसरे के पांव की हड्डी तक टूटी है। इसके चलते इन दोनों को अभी चिकित्सकीय पर्यवेक्षण में रखना तय किया गया है। वहीं दो अन्य अरबाज व कदीम को सोमवार को छुट्टी दिए जाने की संभावना है। चारों के शरीर का कोई ऐसा हिस्सा नहीं, जिस पर चोट न आई हो। खुद मेडिकल कालेज के चिकित्सकों ने यह माना है कि अगर कुछ देर पुलिस इन्हें नहीं बचा पाती तो इनमें से किसी की जान भी जा सकती थी।
उड़ गई थी दो की मृत्यु की अफवाह
अकील नाम का व्यापारी तो सिर में चोट के चलते बेहोश हो गया था, जबकि इसी नाम का दूसरा व्यापारी पांव टूटने के कारण दर्द से कराते हुए गिर पड़ा था। उन्हें देख घटनास्थल से दो की मृत्यु की अफवाह भी उड़ गई थी। तभी अधिकारियों के होश उड़े और वे घटनास्थल पर पहुंचे। कुल मिलाकर किसी तरह चारों की जान बची।
अलहदादपुर में मीट व्यापारियों संग हमला व बवाल की घटना शनिवार से ही सियासी रंग लेती जा रही है। विपक्ष भी इस मामले में हमलावर है। रविवार को कांग्रेस के राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने अपने फेसबुक वॉल पर इस घटना को लेकर पोस्ट शेयर की है, जिसमें इस घटना को रंगदारी न मिलने पर भीड़ हिंसा करार दिया है। साथ में कहा है कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का प्रतिनिधि मंडल जल्द पीडि़तों से मिलेगा, जबकि वे इस मुद्दे को संसद में पुरजोर तरीके से उठाएंगे।
इमरान प्रतापगढ़ी द्वारा फेसबुक आईडी से जो पोस्ट की गई है, उसमें उल्लेख है कि...कल अलीगढ़ में जिस तरह से भीड़ द्वारा मीट कारोबारियों के साथ मॉब लिंचिंग की गई वो किसी आंतकवाद से कम नहीं है, किसी भी संभ्रांत व्यक्ति द्वारा वो विजुअल देख पाना भी संभव नहीं है। पहले मीट कारोबारियों से रंगदारी मांगी गई, सफल ना होने पर गाड़ी में आग लगा दी गई और फिर जानलेवा तरीके से मारा गया। क्या उ.प्र. की कानून व्यवस्था यही है? जिन दिनों में भारत पूरी दुनिया के सामने एकजुटता का संदेश दे रहा है उन्हीं दिनों में ऐसे विजुअल आना क्या सरकार के लिये शर्मिंदगी का कारण नहीं बेनेंगे? क्या प्रशासन का इन गुंडों पर कोई कंट्रोल नहीं है।जल्द ही अल्पसंख्यक विभाग का एक प्रतिनिधिमंडल पीडि़तों से मिलेगा और मैं आने वाले संसद संत्र में इस तरह के मामलों को पुरजोर तरीके से देश की संसद में उठाऊंगा।
स्थानीय स्तर पर भी सोशल मीडिया पर पक्ष-प्रतिपक्ष
इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर स्थानीय स्तर पर विरोध के बीच पक्ष व प्रतिपक्ष में प्रतिक्रिया आना जारी है। लोग तरह तरह की टिप्पणी करते हुए पक्ष प्रतिपक्ष में बयान जारी कर रहे है। कोई कह रहा है कि इस तरह खुलेआम मीट लेकर नहीं जाना चाहिए था। किसी ने इसे पुलिस लापरवाही का परिणाम बताया है। किसी ने इस तरह पीटे जाने का विरोध किया है।
इस घटना में शनिवार से सक्रिय समाजवार्टी पार्टी का प्रतिनिधि मंडल आज दोपहर में एसएसपी से मिलेगा। सपा प्रतिनिधि मंडल दोपहर 11 बजे एसएसपी से मिलने पहुंचेगा। इस प्रतिनिधि मंडल द्वारा मामले में हमला, लूट व रंगदारी मांगने वालों पर ठोस कार्रवाई की बात उठाई जाएगी। पुलिस स्तर से अगर सही जवाब नहीं मिला तो पार्टी आगे आंदोलन की रणनीति तय करेगी।
विवेक बंसल पहुंचे घायलों से मिलने
इस घटना में घायल हुए मीट व्यापारियों से मिलने रविवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विवेक बंसल मेडिकल कालेज पहुंचे। जहां उन्होंने पीडि़तों का हाल जाना। परिजनों से वार्ता की। साथ में अधिकारियों से मामले में ठोस कार्रवाई की बात कही।
सहयोगी नेता को सपा के इशारे पर किया नामजद
इस मामले में भाजयुमो नेता व अलहदादपुर के पूर्व प्रधान अर्जुन सिंह भोलू की नामजदगी पर भाजयुमो के विरोध दर्ज किया है। इस मामले में रविवार को जवाहर पार्क में मीटिंग कर भाजयुमो जिलाध्यक्ष धर्मवीर सिंह लोधी ने प्रेसवार्ता में कहा कि हमारे नेता भोलू सिंह प्रशासनिक अधिकारियों के कहने पर सहयोग करने गए थे। मगर सपा नेताओं के दबाव में उन्हें मुकदमे में नामजद कर दिया है। उन्होंने मामला शांत कराया। इसकी कॉल डिटेल भी है। इस मामले में वे लोग सोमवार को एसएसपी से मिलेगे। अगर भोलू का नाम मुकदमे से नहीं हटाया तो आंदोलन की रूपरेखा बनाएंगे। इस अवसर पर संजू बजाज, अमित गोस्वामी, अर्जुन सिंह भोलू, सौरभ चौधरी, संजय शर्मा, राकेश सहाय, लोकेश नागर, अमित चौधरी, पंकज दिवाकर आदि थे।