कानपुर-टूंडला सेक्शन पर पाता-अछल्दा रेलवे स्टेशन के बीच आजमगढ़ नई दिल्ली 12225 अप कैफियात एक्सप्रेस के पटरी से उतर जाने के कारण बुधवार को पूरे दिन ट्रेनों का आवागमन प्रभावित रहा। इस दौरान सात ट्रेनें रद्द हो गईं तो लगभग 25 से अधिक ट्रेनों का रूट डायवर्ट कर दिया गया।
मंगलवार देर रात ढाई बजे हुई इस दुर्घटना के बाद से अलीगढ़ से कानपुर, अलीगढ़ से दिल्ली, पंजाब, हिमाचल, जम्मू कश्मीर की ओर का यातायात बंद है। अधिकांश ट्रेनों को दिल्ली, कानपुर, गाजियाबाद, टूंडला से ही डायवर्ट कर दिया गया। गाजियाबाद-अलीगढ़-कानपुर रेल खंड पर यातायात बंद है। अप और डाउन दोनों साइड पर ट्रेनों का संचालन नहीं हुआ है। अलीगढ़ में 24 घंटे में लगभग 25 हजार मुसाफिर ट्रेनों से या तो आते हैं या फिर यहां से जाते हैं। दुर्घटना के बाद गुजरे 20 घंटों में लगभग 18 हजार मुसाफिरों का सफर प्रभावित हुआ है।
इस दुर्घटना के बाद अलीगढ़ स्टेशन में तीन हेल्पलाइन नंबरों से मुसाफिरों को जानकारी दी गई। जिसमें 0571-1072, 0571-2403458 और 0571-2403055 नंबर चालू रहे। इन फोन नंबरों पर मुसाफिर रेल संचालन से जुड़ी कोई भी जानकारी ले सकते हैं। स्टेशन अधीक्षक आरके पाठक ने बताया कि मुसाफिरों को हेल्पलाइन से सभी जानकारी दी जा रही है।
इधर, स्टेशन मास्टर कक्ष, पूछताछ में सुबह से ही मुसाफिरों के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। मुसाफिरों ने ट्रेनों के रद्द होने से परेशान होकर एक लाख रुपये की कीमत के लगभग 125 रिजर्वेशन टिकट रद्द कराए हैं। जिसमें ऑनलाइन रिजर्वेशन टिकट और साधारण टिकट शामिल नहीं है। तीनों श्रेणी मिलाकर लगभग ढाई लाख रुपये के टिकट रद्द होने की सूचना मिल रही है। सीएमआई संजय शुक्ला ने बताया कि देर शाम तक केवल रिजर्वेशन का डाटा ही सामने आया है। जरनल टिकट बुकिंग और ऑनलाइन का डाटा अब तक नहीं मिला है।
एंटी टेलिस्कोपिक कोच से बची जानें
अलीगढ़। कैफियात एक्सप्रेस में लगने वाले लाल रंग के कोच एंटी टेलिस्कोपिक हैं। जिसकी बनावट ऐसी होती है कि मुसाफिरों को कम से कम झटके लगे और उनको गंभीर चोटें न लग पाएं। अलीगढ़ स्टेशन के पूर्व स्टेशन अधीक्षक एआर खान ने बताया कि ऐसे आधुनिक कोचों के टकराने में बोगी एक दूसरे के ऊपर नहीं चढ़ती है। इसकी वजह ये है कि दो कोच के जोड़ पर शॉक आब्जर्वर बंपर लगे होते हैं, जिसमें अंदर हैवी ड्यूटी स्प्रिंग होती है। इसलिए कोच आपस में टकराने के बाद एक दूसरे के ऊपर नहीं चढ़ते। एक बात और कि इसकी डिजाइन में कोच के आखिरी किनारों पर शौचालय के बाद दरवाजा होता है। बीच में एक जगह छोड़ी जाती है। जिसके बाद मुसाफिरों की सीटें शुरू होती है। ऐसे में डीरेलमेंट या एक्सीडेंट होने पर कोच जब आपस में भिड़ते हैं तो मुसाफिरों को कम से कम नुकसान होता है। इसी तरह अंदर की दीवारों में भीतर हैवी ड्यॅूटी स्प्रिंग होने से दीवारों को एंटी शॉक बना दिया जाता है। जिससे मुसाफिराें को कम चोट लगती है।