इकराम वारिस, अलीगढ़।
मां वह शब्द है, जो अपने अंदर प्रेम और भावनाओं का संसार समाए हुए है। एक नवजात की किलकारियों से लेकर उसकी सफलता के लिए बजती तालियों तक के सफर में मां ही होती है, जो उसका साथ कभी नहीं छोड़ती। ईश्वर हमसे कितना प्रेम करते हैं।
इसे समझने के लिए ही उसने मां को बनाया है। वह मां ही होती है, जो सिखाती है कि मुश्किल परिस्थिति से लड़ने का साहस कहां से लाएं। इसलिए हे ईश्वर, तुमसे एक ही प्रार्थना है, हर जन्म में इसी मां को ही मेरी मां बनाना। मदर्स डे पर बच्चों ने अपनी मां के प्रति अपने प्रेम, विश्वास व सम्मान का व्यक्त किया।
मां मेरी हिम्मत : प्रिंसी
मां रितु शर्मा ने जीवन के हर पड़ाव पर मेरा मार्गदर्शन कर सफलता की सीढ़ियों पर चढ़ाया है। जीवन में एक समय ऐसा भी आया जब अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में एडमिशन के लिए परीक्षा देने के बाद बहुत घबरा रही थी, लेकिन मां ने समझाया, हिम्मत दी। सुबह उठकर मुझे पढ़ाना हो या फिर जीवन के कठिन पाठ भी सरलतापूर्वक समझाना, मेरी मां सदैव मेरी हिम्मत बन कर रही हैं।
वर्ष 2018 में मां ने मुझे अमेरिकी दूतावास के एक कैंप में भाग लेने के लिए भी प्रेरित किया, जिसमें मैंने काउंसलर बनकर एएमयू का नाम भी रोशन किया। मां का जो स्थान है, उसे कोई और नहीं ले सकता मातृ दिवस पर सभी माताओं को उनके प्रेम और तपस्या के लिए नमन करती हूं।
- प्रिंसी भारद्वाज, 12वीं की छात्रा, एएमयू
मां ने बनाया नेक व काबिल इंसान:आसिम
मां तलत परवीन ने बचपन से ही मुझे पढ़ाई का महत्व समझाया और जमिया मिलिया इस्लामिया से मेरे स्कूल की पढ़ाई पूरी होने के बाद मुझे एएमयू में दाखिला लेने के लिए प्रेरित किया। स्कूल के एक प्रतिभाशाली छात्र के तौर पर 2017 में मुझे अमेरिकन दूतावास के एक कैंप में भाग लेने का भी अवसर मिला।
अपनी इस सफलता का श्रेय में अपनी मां को देता हूं, जिन्होंने मुझे एक काबिल छात्र और नेक इंसान बनाया है। वह मां ही होती हैं, जो हमें भगवान से जोड़ने का मार्ग बताती हैं। वह मेरी मां ही थीं, जिन्होंने मुझे सबसे पहले इस सृष्टि के रचियता के बारे में बताया, उस परमात्मा से जोड़ा। मां का ध्यान आते ही मुझे अपने ईश्वर का स्मरण होता है।
- आसिम रिजवान, छात्र ग्रेजुएशन, एएमयू