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ये हैं तंत्र के गण... शिक्षा व नवाचार से समाज को दे रहे नई दिशा

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अतुल सिंह। - फोटो : CITY OFFICE
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इकराम वारिस
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किसी भी देश के तंत्र में नागरिकों की अहम भूमिका होती है। ऐसे जिम्मेदार नागरिकों की पहल से समाज को नई दिशा मिलती है और देश तरक्की की राह पकड़ता है। अलीगढ़ शहर में भी ऐसे ही कुछ नाम हैं, जो शिक्षा व नवाचार के जरिये समाज में बदलाव की मशाल जलाए हुए हैं। विज्ञान रत्न लक्ष्मण प्रसाद का नवाचार अंतरिक्ष तक पहुंच चुका है। उनके ढेरों आविष्कार विद्यार्थियों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। इनके अलावा, शिक्षिका राफिया निकहत व अतुल सिंह ने शिक्षा की ज्योति जला रखी है, जबकि प्रशिक्षक मजहर उल कमर के मार्गदर्शन में नवोदित खिलाड़ी खेल जगत में मुकाम हासिल कर रहे हैं।
नवाचार से बेहद लगाव : लक्ष्मण प्रसाद
19 अक्तूबर 1930 में जन्मे विज्ञान रत्न लक्ष्मण प्रसाद का कहना है कि उनका नवाचार से बेहद लगाव है। उच्च शिक्षा प्राप्त लक्ष्मण प्रसाद 25 वर्षों तक सार्वजनिक उद्योगों व बहुराष्ट्रीय कंपनियों में कार्मिक प्रबंधक के पद पर कार्यरत रहे। उन्होंने 1995 में विकलांग कल्याण केंद्र अलीगढ़ की स्थापना की। राष्ट्रीय महत्व के 25 नवाचार, जिनमें 12 नवाचारों का सफलता पूर्वक व्यापारीकरण हुआ। उन्होंने 125 लेख और 25 पुस्तकें लिखी हैं, जिनमें सात पुस्तकें अंग्रेजी में हैं। उन्हें कई सम्मान मिल चुके हैं। उनकी पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम से निकटता थी। वह उनके घर पर भी आए थे। उन्होंने प्रयागराज, दिल्ली व अलीगढ़ में छात्राओं के लिए कंप्यूटर लैब की व्यवस्था कराई है।
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ये हैं उपलब्धि
लक्ष्मण प्रसाद ने अपने नवाचार से देश की सेवा की। रेलवे टिकटिंग डेटिंग एंड टाइमिंग मशीन से रेलवे का हर साल करोड़ों रुपया बचाया। इसके एवज में एक रुपया उन्होंने नहीं लिया। इसके अलावा स्पेस मेल कैन्सिलेशन यंत्र का आविष्कार किया, जिसका स्क्वाड्रन लीडर राकेश शर्मा ने स्पेस क्राफ्ट में सफलतापूर्वक प्रयोग किया था। विश्व का प्रथम सूक्ष्म हस्तचलित प्रिंटर माइक्रो मिनी प्रिंटर, करवैक्स बैच कोडर, ऑनलाइन स्वचालित बैच कोडर, ऑटोमैटिक ब्रैड कोडिंग मशीन, आटोमैटिक कार्टन बैच कोडिंग मशीन, ऑटोमैटिक राउंड कंटेनर बैच कोडिंग मशीन, ऑटोमैटिक एगमार्क सीरियल नंबरिंग मशीन, वोटिंग कम्पार्टमेंट, स्टेपल पिन रिमूवर, करेंसी नोट फास्टनर, फर्श से कूड़ा उठाने का उपकरण, आडियो विजुअल सिग्नल, अर्थी रथ का आविष्कार किया है।
बच्चों को शिक्षित करने का उठाया बीड़ा
प्राथमिक विद्यालय रजानगर लोधा की प्रधानाध्यापिका व उत्तर प्रदेश सरकार से सर्वश्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित राफिया निकहत ने खुद और सहयोगी शिक्षिकाओं के अथक प्रयास से विद्यालय में सैकड़ों विद्यार्थियों का दाखिला कराया। उन्होेंने कहा कि जब विद्यालय का जिम्मा संभाला, तब बच्चों की संख्या 135 थी, अब 565 संख्या है। उन्होेंने कहा कि अपने प्रयास व एनजीओ की मदद से विद्यालय को 15 टैबलेट उपलब्ध करवाए। राफिया ने बताया कि उनका जिले मेें पहला विद्यालय है, जहां ऑनलाइन मोड पर प्रवेश शुरू किया गया।
ये किए कार्य
राफिया ने बताया कि प्रयास से विद्यालय और हर कक्षा में सीसीटीवी कैमरे लगवाए गए। विद्यालय में 80-85 फीसदी बच्चों की उपस्थिति रहती है। हर शनिवार को विद्यालय में बाल सभा लगती है। 100 अभिभावकों के मोबाइल पर दीक्षा एप भी डाउनलोड है। शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें सर रतन टाटा ट्रस्ट इनोवेटिव टीचर अवार्ड, यूपी दिवस पर अलीगढ़ रत्न दिया गया।
विद्यार्थियों को सरकारी सेवा में भेजने की जिद
अपने नाम के अनुरूप अतुल सिंह, जो शिक्षा के क्षेत्र में अतुलनीय कार्य कर रहे हैं। वह कहते हैं, विद्यार्थियों को सरकारी सेवा में भेजने की उनकी जिद है। वह अविरल धारा के संस्थापक और केनरा बैंक के प्रबंधक हैं। उनके पिता राकेश पाल सिंह, पुलिस में उपनिरीक्षक के पद पर 28 वर्ष की आयु में बदमाशों के साथ मुठभेड़ में शहीद हो गए थे। बमनोई, अकराबाद में जन्मे अतुल सिंह, केनरा बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान अलीगढ़ में निदेशक के रूप में कार्यरत हैं।
146 विद्यार्थियों को पहुंचाया मुकाम तक
अतुल सिंह ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र-छात्राओं के लिए वर्ष 2011 में निशुल्क शैक्षणिक संस्थान की शुरुआत की। वर्ष 2014 में शैक्षणिक संस्थान का नाम अविरल धारा रखा। वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री मोदी ने अतुल सिंह को निशुल्क शैक्षणिक कार्य के लिए सम्मानित किया था। अब तक निशुल्क शिक्षा पद्धति से संस्था के माध्यम से 146 छात्र छात्राओं का विभिन्न सरकारी सेवा में चयन हो चुका है। वर्तमान में 120 छात्र अध्यनरत हैं। निशुल्क शिक्षा के साथ साथ अन्य सामाजिक सरोकार जैसे रक्तदान, कोविड के दौरान निशुल्क कंसन्ट्रेटर व भोजन सामग्री की व्यवस्था, स्वच्छ भारत अभियान के तहत जागरूकता कार्यक्रम, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, दुर्घटना के दौरान घायलों की मदद करना।
खेलों से बदल रहे खिलाड़ियों की किस्मत
एएमयू के जिम्नेजियम में वरिष्ठ प्रशिक्षक मजहर उल कमर की जन्मभूमि प्रयागराज है, लेकिन उन्होंने अपनी कर्मभूमि अलीगढ़ को बनाया है। मजहर का कहना है कि उनका खेल से अटूट रिश्ता है। उनके पिता रियाज उल इस्लाम भारतीय सेना से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं। मजहर ने मास्टर डिग्री लेने के साथ स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया पटियाला से कोचिंग डिप्लोमा की डिग्री ले रखी है। वह यूपी ओलंपिक एसोसिएशन में सह संयुक्त सचिव, मंडलीय ओलंपिक एसोसिएशन अलीगढ़ मंडलीय सचिव, जिला ओलंपिक एसोसिएशन अध्यक्ष, जिला वेटलिफ्टिंग एसोसिएशन एवं हैंडबॉल एसोसिएशन अध्यक्ष, जिला एथलेटिक एसोसिएशन उपाध्यक्ष, संस्थापक यूपी जिम संगठन हैं।
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ये है उपलब्धि
मजहर का एथलेटिक्स के गोला फेंक में नार्थ जोन इंटर यूनिवर्सिटी में तृतीय स्थान, गोला फेंक में प्रदेश में दो बार प्रथम स्थान, एक बार तृतीय स्थान, राष्ट्रीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता में उत्तर प्रदेश की टीम में चयन, वेटलिफ्टिंग, बॉडी बिल्डिंग एवं पावर लिफ्टिंग में ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी प्रतियोगिता में लगातार तीन वर्षों तक यूनिवर्सिटी टीम की ओर से प्रतिभाग किया। गोला फेंक में एएमयू में वर्ष 1992 में नया रिकॉर्ड बनाया, जो अब तक कायम है। वर्ष 2009 में भारतीय बॉडी बिल्डिंग का मजहर को प्रशिक्षक नियुक्त किया। अंतरराष्ट्रीय बॉडी बिल्डिंग प्रतियोगिता में जाने के लिए भारतीय टीम के साथ प्रशिक्षक के रूप में चयन किया। उनकी देखरेख में दो दर्जन अधिक खिलाड़ी अब तक राष्ट्रीय व प्रदेश स्तर की टीमों में चयनित हुए हैं।

लक्ष्मण प्रसाद।- फोटो : CITY OFFICE

मजहर उल कमर।- फोटो : CITY OFFICE

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