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इस साल फिर आ सकती है आलू फिंकने की नौबत

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आशीष श्रीवास्तव
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इस साल एक बार फिर आलू फिंकने की नौबत आ सकती है। आधी जुलाई गुजर चुकी है और अब तक कोल्ड स्टोरों से मात्र 18 फीसदी आलू ही निकला है। जबकि पिछले साल करीब 24 प्रतिशत आलू जुलाई माह की शुरुआत में ही में शीतगृहों से बाहर आ गया था। बाजार में कम चल रहे दामों के चलते किसान दाम बढ़ने की आस में शीतगृहों से आलू निकालने को तैयार नहीं है। ऊपर से कोरोना की तीसरी लहर आने की आशंका भी बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तीसरी लहर आई तो आलू का शीतगृहों से निकलना मुश्किल हो जाएगा और इसके चलते आलू के दाम और भी गिर सकते हैं।
किसानों के पास बचे मात्र साढ़े तीन माह
अलीगढ़। अक्तूबर के अंत में शीतगृह स्वामी कोल्डों की सफाई एवं मेंटेनेंस के चलते किसानों का आलू बाहर निकाल देंगे। इस परिस्थिति में किसानों के पास अपने आलू खपाने के लिए मात्र साढ़े तीन माह का समय बचा है। एक साथ आलू निकलने की परिस्थिति में आलू के दाम गिरेंगे और किसानों को अपना आलू औने पौने दाम पर निकालने पर मजबूर होना पड़ेगा। ऐसे में खरीददार न मिलने के चलते टिर्री आलू का फिंकना लगभग तय है।
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कोरोना की मार का भी असर
अलीगढ़। आलू के दाम कम रहने और नाममात्र की निकासी के पीछे कोरोना भी एक बड़ा कारण है। कोरोना लॉकडाउन के चलते होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे आदि लगभग पूरे वर्ष ही बंद रहे हैं। इसका असर आलू की खपत पर पड़ा है। यही नहीं कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए डॉक्टर भी हरी सब्जियां खाने की सलाह दे रहे हैं। हरी सब्जियां सस्ती होने एवं उपभोक्ताओं का आलू के प्रति रुझान कम होने से आलू की खपत 15 से 20 प्रतिशत तक कम हुई है।
अत्यधिक उत्पादन भी है कारण
अलीगढ़। इस बार आलू का उत्पादन अधिक हुआ है। पिछले साल जहां 5 लाख 80 हजार मीट्रिक टन आलू का उत्पादन हुआ था। इस सीजन में 8 लाख 27 हजार 894 मीट्रिक टन आलू का उत्पादन हुआ है। इससे उत्साहित किसानों ने कोल्ड स्टोरों के अलावा घरों में भी आलू स्टोर कर लिया। घरों में स्टोर वही आलू इस समय बाजार में चल रहा है। शीतगृहों में रखा आलू मुनाफे की आस में नाममात्र का ही निकला है। बताते चलें कि जिले में 30 हजार हेक्टेयर में आलू का उत्पादन होता है।
आलू के मंडी भाव
-3797-450 रुपये कट्टा, पिछले साल-500 से 550 रुपये कट्टा
-टी-7-550 रुपये कट्टा, पिछले साल-600 से 650 रुपये कट्टा
-चिप्सोना-525 रुपये कट्टा, पिछले साल 500 से 575 रुपये कट्टा
क्या कहते हैं कोल्ड स्टोर स्वामी
-सरकारी आंकड़ों के मुताबिक आलू का उत्पादन पूरे देश में पिछले साल से 25 फीसदी ज्यादा हुआ है। ऊपर से कोरोना लॉकडाउन के दौरान होटल, रेस्टोरेंट व ढाबों के साथ सरकारी स्कूल बंद रहने से मिड-डे मील में भी आलू नहीं खप सका है। कोरोना काल में आलू के प्रति लोगों का रुझान कम हुआ है। इस वजह से आलू के दाम तेजी नहीं पकड़ पा रहे हैं। इसका असर निकासी पर पड़ा है। यही स्थिति रही तो आलू फिंकने की भी नौबत आ सकती है।
- गिर्राज गोदानी, अध्यक्ष अलीगढ़ कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन
क्या कहते हैं किसान
- आलू के दाम पिछली साल की तुलना में कम चल रहे हैं। आलू के बीज गाड़ने का काम अक्तूबर में शुरू होता है। ऐसे मेें किसान कोल्ड स्टोरों से आलू निकालकर क्या करेगा। हमें तो अभी भी दाम बढ़ने की आस है।
संजय सिंह, किसान, ग्राम हरदुआ
-मंडी में आलू के दाम कम मिल रहे हैं। ज्यादा उत्पादन के बाद किसानों ने मुनाफे की आस में कुछ आलू घरों में रोक लिया था। इसी को खपाया जा रहा है। दाम बढ़ेंगे, हम तो तभी अपना आलू निकालेंगे।
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पृथ्वी सिंह चौहान, ग्राम हरदुआ
कोरोना काल में आलू की खपत पहले की तुलना में काफी कम रही है। यही वजह है कि इसके दाम कम चल रहे हैं। ज्यादा मुनाफे की आस में किसान कोल्ड स्टोरों से आलू नहीं निकाल रहा है। इस वजह से अब तक शीतगृहों से मात्र 18 फीसदी आलू की निकासी हुई है।
एनके सहानियां, जिला उद्यान अधिकारी
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