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वार्डों से आ रही भ्रष्टाचार की बू, जांच कमेटी गठित हो : विधायक

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दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय के वार्ड में पड़ा फर्नीचर। - फोटो : CITY OFFICE
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पंडित दीनदयाल संयुक्त चिकित्सालय के तीन वार्डों में करोड़ों रुपये के उपकरण और फर्नीचर भरा पड़ा है। जिसके बारे में खुद स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को नहीं पता था। विधायक अनिल पाराशर ने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन के पास चॉबी तक नहीं थी। दो वार्डों का ताला काटकर अधिकारी व अन्य लोग अंदर पहुंचे थे। उनका दावा है कि यदि सामान को कबाड़ मान लिया जाए तो भी इसकी कीमत एक करोड़ से अधिक मूल्य की होगी। उन्होंने कमेटी गठित कर जांच कराने की मांग की है।
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23 मई 2020 को कोल विधायक अनिल पाराशर ने मंडलायुक्त को पत्र लिखकर बताया था कि पंडित दीनदयाल संयुक्त चिकित्सालय परिसर में एक भवन प्रयोग में नहीं है। इसे कोविड-19 का स्थायी अस्पताल बनाया जा सकता है। पत्र का संज्ञान न लिए जाने पर उन्होंने इसकी शिकायत जिले के नोडल अधिकारी एवं लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव नितिन रमेश गोकर्ण से की थी। शनिवार को जब प्रमुख सचिव ने इस भवन व वार्डों को देखना चाहा तो स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को खुद पता नहीं था।
विधायक अनिल पाराशर ने आरोप लगाया है कि वर्षों से बंद पड़े इन वार्डों को छुपाने का प्रयास किया गया। चाबी तक नहीं थी, दो वार्डों का ताला काटकर अधिकारी एवं अन्य लोग अंदर जा पाए थे। उसमें पड़े सामानों को कबाड़ भी मान ले तो एक करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के हैं। बेड, ट्रॉली, मॉडर्न बेड, अलमारी व पैक्ड कार्टून के साथ-साथ फर्नीचर व अन्य सामान था। अधिकारी इन्वेंटरी भी नहीं दिखा पाए। भाजपा विधायक अनिल पाराशर तो कमेटी बनाकर जांच कराने की मांग कर रहे हैं ताकि पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकें।
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100 बेड का कोविड-19 हॉस्पिटल बनाएंगे
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. बीपी सिंह कल्याणी ने रविवार को पंडित दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि चिकित्सालय प्रशासन द्वारा 4-5 दिन का समय मांगा गया है। एक वार्ड की साफ-सफाई कर दी गई है। यहां पर 100 बेड का कोविड-19 हॉस्पिटल बनाएंगे। स्टॉफ कम पड़ेगा तो उपलब्ध कराएंगे। यहां पर एल-1 या एल-2 मरीज को रखा जा सकता है।
पहले हॉस्पिटल प्राथमिकता, जरूरत पड़ी तो जांच कराएंगे
एसीएम रंजीत सिंह ने बताया कि अभी पहली प्राथमिकता कोविड-19 हॉस्पिटल बनाने की है। पं. दीनदयाल संयुक्त चिकित्सालय 300 बेड का है। 100 बेड का हॉस्पिटल संचालित हो रहा है। 200 बेड का सामान खाली पड़े वार्ड में रखा गया। जरूरत महसूस हुई तो भविष्य में जांच भी कराएंगे। सभी कागजात मौजूद है।
पूर्व सीएमएस ने शुरू कराई थी सामान की गिनती, बीच में हो गया ट्रांसफर
पंडित दीनदयाल संयुक्त चिकित्सालय के पूर्व सीएमएस डॉ. वीपी गुप्ता ने वार्ड में पड़े सामानों की गिनती शुरू कराई थी। एक फार्मासिस्ट को भी लगाया था। इससे खलबली मच गई थी। इसी बीच सीएमएस का स्थानांतरण हो गया और सामान की गिनती का काम रुक गया। पूर्व सीएमएस इसकी शिकायत प्रमुख सचिव से भी कर चुके हैं। उन्होंने इशारा किया था कि अस्पताल में ठेकेदारों का वर्चस्व है और इसकी वजह से यहां की व्यवस्था गड़बड़ा रही है।
पिछले साल फर्नीचर व उपकरण खरीद में लगे थे घोटाले के आरोप
पिछले साल पंडित दीनदयाल संयुक्त चिकित्सालय एवं अतरौली के 100 शैया अस्पताल के लिए फर्नीचर व उपकरण आदि की खरीद में करोड़ों के घोटाले का मामला सामने आया था। करोड़ों रुपये की क्रय प्रक्रिया को 10 दिन में निपटा दिया गया था। आरोप लगे थे कि इसी दस दिन की अवधि में टेंडर, टेंडर खुलने, सामानों की आपूर्ति और पेमेंट तक हो गए थे। इसमें पं. दीनदयाल चिकित्सालय के लिए करीब 5 करोड़ का सामान खरीदा गया था। बरौली विधायक ठाकुर दलवीर सिंह एवं कोल क्षेत्र के विधायक अनिल पाराशर ने उस समय में पूरी टेंडर प्रक्रिया पर कठघरे में खड़ा किया था। आशंका जताई जा रही है कि उस समय खरीदा गया कुछ सामान इन वार्डों में हो सकता है। इसी मामले में तत्कालीन सीएमओ डॉ. एमएल अग्रवाल एवं पंडित दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय की सीएमएस डॉ. याचना शर्मा का स्थानांतरण हो गया था।
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