हक की बात कार्यक्रम में छात्राओं ने जिलाधिकारी से बेबाक सवाल किए। कई छात्राओं ने तो सीधे ही जिलाधिकारी से पूछ लिया कि थानों में महिला उत्पीड़न की शिकायतों को दर्ज करने में आना कानी क्यों की जाती है। उनकी शिकायतों को उसी समय क्यों नहीं दर्ज कर लिया जाता, क्या उनको दर्ज न करने के लिए राजनीतिक दबाव होता है। इस तरह के सवाल पर जिलाधिकारी सेल्वा कुमारी जे ने संतुष्ट करने की पूरी कोशिश की और स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में पहले जांच होती है, उसी के बाद आरोपी के खिलाफ एफआईआर भी होती है, उसमें कोई सिफारिश काम भी नहीं आती है। आप सभी सोशल मीडिया पर विश्वास न करें, क्योंकि इस तरह की मीडिया पर पहले गलत जानकारी प्रसारित की जाती है, बाद में वह हटा भी दी जाती हैं।
कलेक्ट्रेट में बृहस्पतिवार को आयोजित हक की बात कार्यक्रम में चिरंजीलाल बालिका इंटर कॉलेज 12 वीं की छात्रा सलोनी ने महिलाओं की सुरक्षा उनके अधिकार तथा प्रयोग के बारे में सरकार के स्तर से किए जा रहे कार्यों के बारे में जानकारी मांगी। इस बारे में डीएम ने बताया कि वर्तमान में हर क्षेत्र में महिलाओं का दखल बढ़ा है। जागरूकता के लिए बजट का प्रावधान भी किया गया है। सरकार महिलाओं की सुरक्षा के प्रति संवेदनशील है। इसी तरह ब्रिलिएंट पब्लिक स्कूल की छात्रा शिवानी सिंह ने कहा कि यौन हिंसा की शिकायतों पर पुलिस कर्मी संवेदनशील नहीं होते हैं। वह इस तरह के मामलों को गंभीरता से नहीं लेते, इस मामले में सीओ नरेंद्री सैनी ने बताया कि हर थाने में महिला हेल्प डेस्क है, इसी के माध्यम से उनकी शिकायतों का निस्तारण हो रहा है। विश्व भारती पब्लिक स्कूल की छात्रा अक्षिता सिंह ने स्कूल और कार्यालयों में मानसिक उत्पीड़न के मामलों में कार्रवाई न होने के मामले उठाए। इस मामले में भी डीएम ने साफ किया कि जिला स्तर पर कमेटी गठित हैं, उसके समक्ष लोग अपनी शिकायतें रख सकते हैं।
महेश्वर गर्ल्स इंटर कॉलेज की 12 वीं की छात्रा अंजलि वार्ष्णेय ने कहा कि जब ग्रंथों में नारी को पूजनीय माना गया है तो अत्याचार क्यों हो रहे हैं ? डीएम ने कहा कि इसके लिए महिलाओं को जागरूक होकर अत्याचार एवं उत्पीड़न के खिलाफ अपनी आवाज स्वयं बुलंद करनी होगी। डीएवी इंटर कॉलेज की छात्रा चारू वर्मा ने जानना चाहा कि दहेज के लेन-देन की शिकायत कहां और कैसे दर्ज करा सकते हैं । रतन प्रेम डीएवी इंटर कॉलेज की छात्रा पूनम ने शैक्षिक और लैंगिक असमानता पर सवाल उठाया। इस मामले में प्रभारी एडीआईओएस मनोरमा ठाकुर ने बताया कि सभी को समान शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत शिक्षा प्रदान की जा रही है। विंग्स ऑफ डिजायर एनजीओ की तैय्यबा इशहाक ने पति- पत्नी के मध्य घरेलू विवाद के समाधान के बारे में सवाल किए।
राज्य महिला आयोग की सदस्य मीना कुमारी ने कहा कि आज बेटा और बेटी में कोई अंतर नहीं रह गया है। बरसों पहले बेटियों को गर्भ में मार दिया जाता था या फिर बेटी के जन्म को लेकर गर्भवती को तरह - तरह के ताने मिलते थे। अब जागरूकता कार्यक्रमों के बलबूते बेटियों के जन्म पर मिठाइयां बांटकर खुशियां मनाई जाती हैं। सरकार की कन्या सुमंगला, मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना आदि के बारे में भी जानकारी दी गई।
इस दौरान जिला प्रोबेशन अधिकारी स्मिता सिंह,प्राचार्य शर्मिला शर्मा, अर्चना फौजदार, डॉ. राहुल कुलश्रेष्ठ, सविता, सीमा अब्बास, सीमा सिंह, वर्षा सिंह आदि मौजूद रही। कार्यक्रम में ब्रिलिएंट पब्लिक स्कूल, विश्व भारती पब्लिक स्कूल, उदय सिंह जैन इंटर कॉलेज, रतन प्रेम डीएवी बालिका इंटर कॉलेज, महेश्वरी गर्ल्स इंटर कॉलेज, चिंरजीलाल कन्या इंटर कॉलेज, टीकाराम कन्या इंटर कॉलेज की छात्राएं, शिक्षिकाएं थीं । संचालन कल्पना जादौन ने किया।