फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हालात काबू हो रहे..पर मौतों का डर कायम है

विज्ञापन
विज्ञापन
जिले में कोरोना संक्रमण की रफ्तार पर लगातार ब्रेक लग रही है। मगर अभी जिले के देहात क्षेत्र में लोग डरे हुए हैं। इस डर की मूल वजह है, वहां पंचायत चुनाव के बाद हुईं मौत। इसी क्रम में हमने सीएचसी छर्रा और अकराबाद से लाभान्वित होने वाले गांवों में फैल रहे संक्रमण और बीमारी पर गौर किया तो यहां अब तक हुईं मौतों से लोग दहशत में हैं।
विज्ञापन

यह बात अलग है कि अब बीमारियों का प्रसार कम हो रहा है। कुछ गांवों को छोड़ दें तो बहुत कम मरीज सामने आ रहे हैं। मगर दहशत का आलम यह है कि लोग किसी भी छोटी मोटी परेशानी पर भी सीधे जिला मुख्यालय पहुंचकर डॉक्टर की सलाह ले रहे हैं। हालांकि गांव-गांव आशाओं द्वारा किट वितरित की जा रही हैं। मगर झोलाछापों के सहारे इलाज पर भी लोग ज्यादा भरोसा कर रहे हैं। पेश है छर्रा व अकराबाद क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की विस्तृत रिपोर्ट...
अकेले छर्रा कस्बा में 20 से ज्यादा मौतों की दहशत
सीएचसी छर्रा में कस्बा छर्रा के अलावा करीब 80 गांव आते हैं। दो अन्य पीएचसी गंगीरी व बरला भी संचालित हैं। मगर वहां पहले से ही स्टाफ की कमी है। छर्रा पर कोविड वैक्शीनेसन का काम चल रहा है। यहां के हालात की बात करें तो कस्बा के अलावा बरौली, सुनपहर, रुखाला, सिरसा, छबीलपुर ऐसे गांव रहे हैं, जहां बीमारी का सर्वाधिक प्रसार रहा है।
विज्ञापन

अकेले कस्बा छर्रा में 20 से अधिक, सुनपहर में 5, बढ़ारी में 3 मौत हुईं। इसके अलावा अन्य कई गांवों में भी मौत हुईं। जिसके चलते लोगों में दहशत का माहौल है। वर्तमान में भी सुनपहर व बढ़ारी में निमोनिया, मलेरिया व वायरल पीड़ित मरीज पड़े हैं। ज्यादातर क्षेत्र के गांवों में झोलाछापों या कस्बे के 5 नर्सिंगहोमों के सहारे इलाज लिया जा रहा है। 25 से अधिक लैब संचालित हैं।
वहां भी जांच के लिए मरीजों की भीड़ लगी रहती है। इन लैबों में मलेरिया, निमोनिया व वायरल की जांचें की जा रही हैं। आशा व एएनएम लगातार गांव-गांव किट बांट रही हैं। वैक्शीनेसन का काम भी चल रहा है। जानकारों व आंकड़ों के अनुसार बीमारियों का प्रसार कम हो रहा है। मगर लोगों में अभी दहशत कम नहीं हो रही है।
अकराबाद कस्बे में हो चुकी हैं 25 से ज्यादा मौत
अकराबाद क्षेत्र में सीएचसी के अलावा पिलखना, विजयगढ़ व बमनोई ही स्वास्थ्य सेवाओं के मात्र सरकारी केंद्र हैं। इसके अलावा झोलाछापा ही यहां इलाज का बड़ा साधन है। यहां बीमारी के माहौल पर बात करें तो अकेले अकराबाद में 25 से अधिक मौत हुईं हैं और आसपास के गांवों में भी एक दर्जन से अधिक मौत हुई हैं।
हां, सरकारी आंकड़ों के अनुसार क्षेत्र में 4 मौत कोविड से हुईं। मगर वह भी बाहर के अस्पतालों में इलाज के चलते हुई हैं। इन दिनों यहां बीमारी दुभिया, मिर्जा चांदपुर, इरखनी में है। बाकी क्षेत्र में हालात लगातार सुधर रहे हैं। इन गांवों में कई घरों में लोग बुखार, वायरल आदि बीमारियों से परेशान हैं।
यहां लोग झोलाछापों के अलावा आशा व एएनएम के सहारे भी इलाज ले रहे हैं। इनके द्वारा बांटी जा रही किटों से भी इलाज लिया जा रहा है। चूंकि पनैठी का हिस्सा शहर से सटा हुआ है। इसलिए वहां से लोग सीधे शहर में इलाज के लिए पहुंचते हैं। कुल मिलाकर हालात काबू होते दिख रहे हैं। मगर मौतों ने दहशत का माहौल जरूर बना रखा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें