विजयगढ़ में 45 फीट ऊंचे रावण के पुतले को तैयार करते कारीगर। संवाद
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कस्बे में रावण का पुतला बनाने की परंपरा 94 वर्षों से एक ही परिवार निभा रहा है। इस बार भैरव वाले मैदान में 45 फीट ऊंचा रावण तैयार किया जा रहा है। पुतले का चेहरा आकर्षक बनाया गया है, जो दहन के समय कई मिनट तक हंसता नजर आएगा। परिवार के छह सदस्य करीब 10 दिन से इसे तैयार करने में जुटे हैं।
कारीगर धर्मेंद्र व योगेंद्र ने बताया है कि उनके बाबा रामरतन ने रामलीला की शुरुआत के समय रावण का पुतला बनाना शुरू किया था। उस समय रामलीला के पूर्व अध्यक्ष वैद्यराज देवीशरण गर्ग ने आयोजन शुरू कराया था। इसके बाद उनके पिता यादराम ने यह जिम्मेदारी संभाली।
दोनों भाइयों ने भी पिता के साथ पुतला बनाने में सहयोग किया। अब वे इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने बताया कि परिवार पीढ़ियों से कम मजदूरी में रावण का पुतला बनाता आ रहा है। उनके लिए यह केवल काम नहीं, बल्कि पूर्वजों से मिली परंपरा और कस्बे की रामलीला से जुड़ी विरासत है।
- बचपन से ही अपने बुजुर्गों के साथ रावण का पुतला बनाते आ रहा हूं। हार साल पुतला बनाता हूं। इस बार भी परिवार के आठ सदस्य पिछले 10 दिन से पुतला बनाने में जुटे हैं। -योगेंद्र कुमार, कारीगर।
- श्रीराम-लक्ष्मण की रामदल जाहरवीर मंदिर से शुरू होकर भैरव फील्ड स्थित मेला स्थल पहुंचेगी। श्रीराम-लक्ष्मण घोड़ों पर सवार होकर निकलेंगे, जबकि रथ पर रामसेना चलेगी। - राजेश गर्ग, संयोजक, रामलीला कमेटी विजयगढ़।