अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति ले. जनरल (सेवानिवृत्त) जमीरउद्दीन शाह एवं सह कुलपति बिग्रेडियर (सेवानिवृत्त) सैयद अहमद अली के विदेशी दौरे को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैैं। देश के शीर्ष ऑडिट नियंत्रक एवं लेखा महापरीक्षक ने अपनी रिपोर्ट (वर्ष 2014-15) में इसको लेकर कई तरह के सवाल खड़े किए हैं। आडिट टीम ने अपनी रिपोर्ट में यहां तक कहा है कि कुलपति लीव रूल और पावर का दुरुपयोग कर रहे हैं। इसमें कहा गया है कि कुलपति इंटरनेशनल कांफ्रेंस में भाग लेने विदेश जा सकते हैं, पर इससे पहले उन्हें यूनिवर्सिटी के विजिटर (राष्ट्रपति) को सूचित करना होगा। जबकि सह कुलपति को यह सुविधा प्राप्त नहीं है।
वीसी को इंटरनेशनल कांफ्रेंस में भाग लेने के लिए छुट्टी का प्रावधान है। नियमानुसार, सीएल (कैजुअल लीव) छोड़कर बाकी छुट्टियों की रिपोर्ट एग्जीक्यूटिव काउंसिल को करनी होती है। आडिट रिपोर्ट में सवाल उठाने हुए कहा गया है कि कुलपति ने ऐसा नहीं किया और बिना अनुमति के ही वीसी के साथ पीवीसी विदेशी दौरों पर जाते रहे। इस बारे में उन्हाेंने कोई स्पष्ट कारण भी नहीं बताया। यही नहीं कारण स्पष्ट किए बिना ही कुलपति देश में भी अनुपयोगी यात्रा करते रहे। इसपर बहुत बड़ा एमाउंट खर्च किया गया। एएमयू प्रशासन आडिट टीम के सामने यह भी साबित नहीं कर पाया कि दोनों इंटरनेशनल कांफ्रेंस शामिल होकर आए हैं।
आडिट टीम द्वारा दिसंबर 2015 से जनवरी 2016 के बीच चार बार विदेशी दौरा से संबंधित ब्योरा मांगने के लिए रिमाइंडर भेजा गया, पर एएमयू प्रशासन इसका जवाब नहीं दे पाया। इस बारे में आडिट रिपोर्ट केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय एवं यूजीसी को भी भेजा गया है। उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ वर्षों में कुलपति एवं सह कुलपति अमेरिकी, यूरोपीय एवं खाड़ी देशों का दौरा कर चुके हैं। इस बारे में कोशिश के बावजूद यूनिवर्सिटी के वित्त अधिकारी से बात नहीं हो पाई। जबकि इस संबंध में जनसंपर्क कार्यालय के एमआईसी डॉ. राहत अबरार से पूछने पर बताया गया कि अभी कुलपति विदेश में हैं। कार्यालय बंद होने के कारण इस संबंध में कुछ भी बताना संभव नहीं है।