मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को आकर्षित नहीं कर पा रही है। वर्ष 2019-20 के मुकाबले वर्तमान वित्तीय वर्ष में सिर्फ 60 आवेदन हुए, जबकि समाज कल्याण विभाग को 225 शादियां कराने का लक्ष्य मिला है। ये शादियां दिसंबर माह में ही करानी हैं। अब विभाग शादी के जोड़ों को तलाश रहा है। मगर, सफलता नहीं मिलने विभागीय अफसरों की सिरदर्दी बढ़ गई है।
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के संचालन का जिम्मा समाज कल्याण विभाग के पास है। आवेदन के बाद लाभार्थियों की जांच एवं सत्यापन के बाद चयन होता है। ग्रामीण क्षेत्र में बीडीओ एवं शहरी क्षेत्र में नगर निगम के जरिये इस योजना में आवेदन किया जाता है। एक बेटी की शादी पर सरकार कुल 51 हजार रुपये खर्च करती है। इनमें 35 हजार रुपये बेटी के बचत बैंक खाते में जमा कराए जाते हैं। 10 हजार रुपये का गृहस्थी का सामान, छह हजार रुपये खानपान, पुरोहित आदि पर खर्च किए जाते हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस योजना में वर्ष 2018-19 में 329 शादियां हुई थीं। इसके बाद 2019-20 में 425 शादियां हुई थीं। वर्ष 2020 में कोरोना काल आने के बाद मात्र 196 शादियां ही हुईं। इस वित्तीय वर्ष में कोरोना काल से पहले विभाग ने 115 शादियां कराई थीं। बताते हैं कि पहले शादी के लिए विभाग के पास आवेदनों की भरमार रहती थी। अब विभाग को उल्टा गांव-मोहल्लों में जाकर लोगों को इस योजना का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
ये है स्थिति
- 2018-19 में 329 शादियां हुईं
- 2019-20 में 425 शादियां हुईं
- 2020-21 में 196 शादियां हुईं
- मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना मेें कोरोना काल के बाद से आवेदकों की संख्या में कमी आई है। शादी के लिए पात्र जोड़ों को तलाशा जा रहा है। इस महीने में ही 225 शादियां कराने का सरकारी लक्ष्य रखा गया है।
- मनीष कुमार, जिला समाज कल्याण अधिकारी