न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह ने कहा कि पुरानी पीढ़ी इस पीढ़ी को देश सौंपकर चली गई। आने वाले समय में आपको देश के लिए कुछ करने का मौका मिलेगा, जब तक हम समाज के अंतिम पायदान के व्यक्ति को न्याय, सम्मान और उसकी बेसिक जरूरतों को पूरा नहीं करते, तब तक हमारा विकसित भारत का सपना पूरा नहीं होगा, इसमें देरी होगी। वह 13 दिसंबर को केएमवी इंटर कॉलेज में- विकसित भारत 2047 विषय पर आयोजित सेमिनार को संबोधित कर रहे थे। न्यायमूर्ति इसी कॉलेज के पुरातन छात्र रहे हैं।
उन्होंने सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत के एक वक्तव्य का उदाहरण देते हुए कहा कि जिन्हें अपने अधिकारों के बारे में पता नहीं है वह अपने को कितना सुरक्षित महसूस करते हैं? उन्होंने पूर्व सीजेआई जस्टिस बीआर गवई के वक्तव्य का उदाहरण देते हुए कहा कि केवल अधिकारों का होना पर्याप्त नहीं है। अगर नागरिक उनके प्रति जागरूक नहीं है। समाज के अंतिम व्यक्ति के अधिकारों के प्रति नहीं सोचेंगे तो अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में उतनी ही देर लगेगी।
न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह ने कहा कि इंसान कितने भी बड़े पद पर पहुंच जाए वह छात्र ही रहता है, क्योंकि वह जीवनभर कुछ न कुछ सीखता है। शिक्षक हमारी धरोहर होते हैं। पहले बिल्डिंग नहीं होती थीं तब भी बेहतर पढ़ाई होती थी। आज पढ़ाई के लिए सभी सुविधाएं मिल रही हैं। आपको सिर्फ पढ़ना है। विद्यार्थियों को सीख दी कि दूसरे की लाइन मत काटो, अपनी लाइन बड़ी खींचो। दूसरी लाइन स्वत: छोटी हो जाएगी। यदि कोई कमजोर है। उसके पास सुविधाएं नहीं हैं तो उसकी मदद करें। हो सकता है कि वह आगे निकल जाए। आप ऐसी स्थिति में हैं कि सहयोग कर सकें और वह बड़ा बन जाए तो आपको कभी नहीं भूलेगा। कार्यक्रम में प्रधानाचार्य मेजर पीके श्रोत्रिय, एडीजे गगन भारती, संदीप रुहेला, प्रमोद शर्मा, मोतीलाल डेविड, हेवेंद्र चौधरी, देवेंद्र सिंह, सीसी सिंह राघव, पृथ्वीराज शर्मा, काजल सिंह मौजूद रहे।
छोटे-छोटे कर्तव्यों से स्वयं सुरक्षित हो जाएंगे
न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह ने विद्यार्थियों को उनके कर्तव्य भी समझाए। कहा कि पर्यावरण की रक्षा भी कर्तव्य है। पर्यावरण को नष्ट न होने दें। सामाजिक समरसता से रहें। किसी को अपमानित करने के बजाय उसको प्रोत्साहित करें। बहन-बेटियों को उसी नजर से देखिए जैसे अपने घर में देखते हैं। छोटे-छोटे कर्तव्यों से अधिकार स्वयं सुरक्षित हो जाएंगे।
कॉलेज के हॉल में एसी लगवाने की घोषणा की
केएमवी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य मेजर पीके श्रोत्रिय ने बताया कि न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह कॉलेज में वर्ष 1995 बैच के छात्र रहे हैं। उनके सहपाठी विजय मंगल गुप्ता ने एक लाख रुपये, अजय विक्रम, निधीष कुमार, वैभव माहेश्वरी और यतेंद्र वार्ष्णेय ने 51-51 हजार रुपये कॉलेज को दान दिए। न्यायमूर्ति ने भी कॉलेज के हॉल में छात्रों की सुविधा के लिए एसी लगवाने की घोषणा की है। इसके बाद जीएन गार्डर में समरसता भोज में भी वह शामिल हुए। अपने पुराने सहपाठियों से मिले और सभी लोग एक-दूसरे को देखकर कुछ पल के लिए भावुक हो गए।