हर साल 18 अप्रैल को मनाया जाने वाला विश्व विरासत दिवस हमें अपनी उन जड़ों से जोड़ता है, जो ईंट-पत्थरों के रूप में हमारे गौरवशाली इतिहास की गवाह हैं। अलीगढ़ की जामा मस्जिद और एएमयू का स्ट्रैची हॉल जैसी इमारतें विश्व पटल पर अपनी वास्तुकला की छाप छोड़ती हैं।
यूनेस्को की सूची में यह बेशकीमती नगीने दर्ज हैं। अलीगढ़ की दो प्रमुख संरचनाओं का ऐतिहासिक महत्व वैश्विक स्तर पर स्वीकार किया गया है। सन 1728 में निर्मित ऊपर कोट की जामा मस्जिद मुगलकालीन स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना है। इसकी मीनारों पर सोने की नक्काशी और इसका विशाल गुंबद शहर के ऊंचे स्थान पर स्थित होने के कारण दूर से दिखाई देता है। यह मस्जिद न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि अलीगढ़ के प्राचीन वैभव का प्रतीक भी है।
इसी तरह अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का ऐतिहासिक स्ट्रैची हॉल यूनेस्को की सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल है। सन 1877 में लॉर्ड स्ट्रैची के नाम पर बने इस हॉल की गोथिक शैली की वास्तुकला और इसकी शानदार बनावट इसे दुनिया भर के शोधकर्ताओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनाती है। यह सर सैयद अहमद खान के आधुनिक शिक्षा के विजन का जीवित स्मारक है।
घोषणा के इंतजार में किला और मालवीय पुस्तकालय
शहर में कई ऐसी इमारतें भी हैं जो ऐतिहासिक रूप से अत्यंत समृद्ध हैं, लेकिन उन्हें आधिकारिक तौर पर वह दर्जा मिलना अभी शेष है। इब्राहिम लोदी के समय से लेकर मराठों और अंग्रेजों तक के शासन का गवाह रहा अलीगढ़ किला सामरिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अमूल्य है। इसी तरह शहर के बीचों-बीच स्थित मालवीय पुस्तकालय ज्ञान की प्राचीन धरोहर और सादगीपूर्ण वास्तुकला का संगम है।
सन 1950 से पहले बनी ऐतिहासिक महत्व की वह इमारत जो कि सांस्कृतिक महत्व रखती हो। स्थानीय इतिहास में अहम स्थान रखती हो। वह विरासत की श्रेणी में आ सकती है। - अनुपम श्रीवास्तव, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी
एएमयू का स्ट्रैची हॉल। संवाद