अग्निपथ योजना के विरोध में देश भर में बवाल मचा हुआ है। बृहस्पतिवार को अलीगढ़ में हल्का प्रदर्शन हुआ। शुक्रवार के दिन यमुना एक्सप्रेस वे और गभाना हाईवे पर एकत्रित होने की कॉल अज्ञात संगठन की ओर से गई थी। सोशल मीडिया पर व्हाट्सएप ग्रुपों में यह पोस्ट लगातार वायरल हो रही थी। यह जानकारी पुलिस को थी । मगर पुलिस को अंदेशा न था कि बवाल इतना उग्र हो जाएगा। दूसरा पुलिस का फोकस जुमे के सुरक्षा इंतजाम पर रहा। इसी का फायदा इन नौजवानों ने उठाया और टप्पल में अराजकता कर बैठे।
कोचिंग सेंटरों पर एकत्रित हो रहे नौजवान, खुफिया तंत्र अंजान
सोशल मीडिया पर कॉल के बाद नौजवानों को क्षेत्रवार उन कोचिंग सेंटरों पर एकत्रित किया गया, जो सेना भरती की तैयारी कराते हैं। टप्पल में हुए उपद्रव में आसपास के गांवों के ही नौजवान थे। ये सभी उसी इलाके के कोचिंग सेंटरों में तैयारी करते हैं जोकि खेरेश्वर के आसपास हैं और इर्द-गिर्द के गांवों के निवासी हैं। इन तमाम तथ्यों से खुफिया तंत्र अंजान रहा। खुफिया तंत्र को लगा कि ये नौजवान थोड़ी संख्या में एकत्रित होंगे, उसी के अनुसार दोनों जगहों पर तैयारी की गई। खेरेश्वर हाईवे पर तो बात संभाल ली गई। मगर टप्पल पर बात संभलने के बजाय बिगड़ गई। इसके विपरीत खुफिया तंत्र को प्रदर्शन शुरू होने के दिन से ही कोचिंगों पर निगरानी के निर्देश थे। मगर इस निगरानी का कोई लाभ नहीं मिला।
नौजवानों के भविष्य की चिंता भी बनी अराजकता का कारण
दबी जुबां से ये बात पुलिस प्रशासन के अधिकारी भी स्वीकार रहे हैं कि नौजवान इतने आक्रामक नहीं थे। उनकी भीड़ में शामिल अराजक नेतृत्वकर्ता ज्यादा उग्र थे। पुलिस अधिकारियों को यह चिंता सता रही थी कि अगर पुलिस को छूट दे दी गई तो नौजवानों का ज्यादा नुकसान हो जाएगा। उनके भविष्य को ध्यान में रखकर ही समझाकर बातचीत के माध्यम से ही हल निकालने का प्रयास किया जा रहा था। इसी चिंता का लाभ भीड़ में शामिल उग्र नेतृत्वकर्ताओं ने उठाया और घटना को अंजाम दे दिया।
मोबाइल तक नहीं लाए थे साथ
पुलिस लोकेशन पता न कर ले इसी कारण उपद्रव में शामिल नौजवान व उनके नेतृत्वकर्ता अपने साथ मोबाइल तक नहीं लाए थे और न किसी को वे मोबाइल चलाने दे रहे थे। मोबाइल चलाने वाले, वीडियो बनाने वाले, सीसीटीवी और मीडियाकर्मी इसी वजह से उनके निशाने पर रहे। जट्टारी में व्यापारी और एक महिला को इसी वजह से पीटा और उनके मोबाइल भी छीन लिए । एक मीडियाकर्मी से भी अभद्रता की गई।
शुरुआत में अधिकारियों ने नहीं दिया सही अपडेट
सांप्रदायिक दृष्टि से अतिसंवेदनशील शहरों में शामिल अलीगढ़ में जुमे को लेकर प्रशासन पहले से सतर्क था। इसी के चलते खुद डीएम एसएसपी सुबह से शहर में ही नजर बनाए हुए थे। वे अग्निपथ प्रदर्शन की खबर पर खेरेश्वर तक भी पहुंचे थे। इसी बीच टप्पल में युवकों ने एक बस को आग लगा दी। मगर यह जानकारी वहां मौजूद अधिकारियों ने उच्च अधिकारियों को नहीं दी। मीडिया के जरिये यह खबरें जिले व मंडल के अधिकारियों तक पहुंचीं तभी अधिकारियों को लगा कि हालात गंभीर हैं। इसी के बाद जिले के अधिकारी टप्पल के लिए रवाना हुए। फोर्स को भी टप्पल बुलाया गया। इसके बाद सही तथ्य उजागर हो सका कि घटना वाकई गंभीर है। इस पर डीएम-एसएसपी, डीआईजी कमिशभनर ने निचले स्तर के अधिकारियों के प्रति नाराजगी भी जताई है।
नौकरी मांग रहे छात्रों पर नहीं किया दंगा नियंत्रण स्कीम का प्रयोग
पुलिस पिछले कई दिन से दंगा नियंत्रण रिहर्सल कर रही थी। ये तैयारी कानपुर, प्रयागराज में जुमे पर हुए बवाल के मद्देनजर थी। मगर शहर में सब सामान्य रहा। जब पुलिस को टप्पल बुलाया तो इस बात का संदेश दिया गया कि ये नौकरी मांग रहे युवा हैं। इसलिए इन पर इस तरह बल प्रयोग नहीं करना है। अगर पुलिस को छूट मिलती तो शायद बवाल इतना नहीं बढ़ता।