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Aligarh News: अतरौली की धरोहर है गोलाबरी का पेड़

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जिले में कई महत्वपूर्ण स्थल और विरासत हैं, जिनका अपने आप में एक अलग इतिहास है, लेकिन अतरौली में प्राचीन धरोहर के रूप में गोलाबरी के नाम से विख्यात बरगद का विशाल पेड़ अपनी अलग पहचान रखता है। नगर के मोहल्ला श्रीराम नगर में स्थित गोलाबरी का पेड़ अपनी विशालता और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है और इसकी धार्मिक मान्यता है।
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स्थानीय लोगों के अनुसार, पेड़ लगभग 150 साल पुराना बताया जाता है। निरंजनलाल बताते हैं कि यहां प्रत्येक बृहस्पतिवार को लोग काफी दूर-दूर से पूजा करने आते हैं। इस पेड़ की ऊंचाई करीब 40 मीटर और गोलाई करीब 25 फीट है। इसकी शाखाएं और जड़ें काफी क्षेत्र में फैली हुई हैं। जमीन तक शाखाएं आने से ये दर्जनों पेड़ों का रूप ले चुका है।
ऐतिहासिक महत्व

- मान्यता है कि इस पेड़ के नीचे विशालकाय सर्प रहता है, जिसे लोग बाबा कहते हैं। यह कभी कभार ही बाहर निकलता है। बैसाख और कार्तिक मास में फसल निकासी के बाद लोग अनाज चढ़ाने आते हैं। इससे यह पेड़ आस्था का केंद्र है। स्थानीय निवासी अखिलेश शर्मा बताते हैं कि आजादी के समय देशभक्त जंगल में इस पेड़ के नीचे बैठकर ही योजनाएं बनाते थे।
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नरौरा में है सबसे विशालकाय सिद्धबरी
जिला बुलंदशहर के रामघाट में स्थित सिद्धबरी एक प्राचीन बरगद का पेड़ एक प्राचीन धरोहर है। यह पेड़ लगभग 500 साल पुराना है। मान्यता है कि यहां कई संतों ने सिद्धि प्राप्त की थी। इसे लोग बेहद पवित्र मानते हैं और सदियों से पूजते आ रहे हैं। तमाम आपदाओं और बीमारियों का सामना करने के बाद आब भी अच्छी स्थिति में है। सिद्धबरी के पेड़ को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं और इसकी पूजा करते हैं।
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- अतरौली में गोलाबरी का पेड़ एक धरोहर है। इसकी पूजा के लिए काफी दूर से लोग आते हैं। लोगों में इसकी धार्मिक मान्यता है। - गीता देवी, पूर्व सभासद।
- धार्मिक मान्यता के लिए गोलाबरी प्रसिद्ध है। यहां काफी लोग अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं। लोगों के विश्वास का प्रतीक है।- अनारा देवी, अतरौली।
- किसान फसल निकलते ही यहां अनाज लेकर आते हैं। वन विभाग इसको वन धरोहर का दर्जा दिलाने के लिए प्रस्ताव भेजे।- अंजलि, छात्रा।
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