आरटीओ कार्यालय में फिटनेस के लिए खड़ी बस और ट्रक। -स्रोत अमर उजाला
एक अप्रैल से लागू व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (वीएलटीडी) के नियम ने ट्रक और बस संचालकों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। वीएलटीडी के बिना वाहनों को फिटनेस प्रमाणपत्र न मिलने के कारण बड़ी संख्या में ट्रक और बसों का फिटनेश प्रमाण पत्र नहीं मिल पा रहा है। इससे वाहन स्वामियों का कारोबार प्रभावित हो रहा है।
संभागीय परिवहन कार्यालय में रोजाना वाहन स्वामियों की भीड़ उमड़ रही है, लेकिन डिवाइस न होने से वह मायूस लौट रहे हैं। बाजार में सीमित डिवाइस होने के कारण कीमतें भी बढ़ रही हैं। ट्रक संचालक संजय पंडित का कहना है कि सरकार ने नया नियम तो लागू कर दिया, लेकिन बाजार में पर्याप्त संख्या में वीएलटीडी उपलब्ध नहीं कराई गई हैं, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। हालांकि उन्होंने फिटनेस समाप्त होने से पूर्व ही फीस जमा कर दी थी लेकिन विभागीय अधिकारी नए नियमों के अनुसार ही वाहन को फिटनेस प्रमाण पत्र देने की बात कर रहे हैं।
ट्रांसपोर्टर मुकेश कुमार का कहना है कि उन्होंने पहले ही डिवाइस के लिए आवेदन कर दिया था, लेकिन सप्लाई और इंस्टॉलेशन में देरी के चलते उनका काम अटक गया है। वाहन खड़े होने से आय बंद हो गई है। ट्रांसपोर्ट कारोबार से ही जुड़े नरेंद्र कुमार, धर्मपाल सिंह के अनुसार, वाहनों के खड़े होने से माल ढुलाई और यात्री सेवाओं पर सीधा असर पड़ रहा है। आरटीओ प्रशासन दीपक कुमार शाह ने माना कि शुरुआती दिनों में डिवाइस की कमी की समस्या सामने आ रही है, जिसे जल्द ही दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।