सुविधा के बाद अब मुसीबत बन रही प्लास्टिक के थैलेे या पॉलीथिन शहर के नाले-नालियों का दम घोंट रही हैं। प्रदेश सरकार ने इन पर 21 जनवरी से प्रतिबंध लगाने का फैसला किया जिसका कि आम लोग स्वागत कर रहे हैं।
इसके बाद देखना यह होगा कि आम लोग पॉलीथिन का प्रयोग व्यवहार में किस हद तक कम कर पाते हैं। पॉलीथिन का सबसे पहला और प्रत्यक्ष प्रभाव नाले और नालियों के चोक होने के रूप में देखा गया।
इसके बाद इनके जलने पर पर्यावरण को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई। अब इसके इस्तेमाल के प्रतिबंध से उम्मीद की जानी चाहिए कि वातावरण में प्लास्टिक की मात्रा कुछ हद तक नियंत्रित हो पाएगी।
क्या है प्लास्टिक?
सिंथेटिक या सेमी सिंथेटिक आर्गेनिक (इन्हें आर्गेनिक पॉलीमर भी कहा जाता है) को निश्चित ताप पर ढालकर सोलिड अब्जेक्ट में बदला जा सकता है। वह तत्व जिनका आकार बिना टूटे ही बदल जाता हैं उन्हें पॉलीमर कहते हैं।
कम कीमत, मैन्यूफैक्चरिंग में आसानी, विविधता और पानी से कोई प्रभाव नहीं होने के कारण उत्पादों के लिए प्लास्टिक पसंदीदा मैटिरियल बन गया।