महानगर के जेएन मेडिकल कॉलेज रोड सरसैयद नगर में अधिवक्ता एमवाई उमर और उनकी पत्नी अजीज फातिमा की हत्या उसी रिश्ते ने कराई, जिस पर पहले ही दिन से हर किसी का शक था। पुलिस ने हत्याकांड का खुलासा करते हुए दंपति की दत्तक पुत्री सहित चार आरोपी दबोच लिए। इस घटना को दत्तक पुत्री की मदद से उसके सगे भाई ने अपने गैंग के साथ अंजाम दिया। खुद दत्तक पुत्री के एक झूठ ने पुलिस की मुश्किल आसान कर दी और घटना के रहस्य से पर्दा उठता चला गया। फिलहाल युवती के भाई सहित दो आरोपी फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस लगी है।
एसएसपी लव कुमार ने बुधवार को प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि अधिवक्ता दंपति ने शाइस्ता उर्फ कल्लो निवासी जीवनगढ़ को उस समय गोद लिया था, जब वह तीन साल की थी। इसके बाद 23 साल की उम्र होने पर उसका प्रेम विवाह शादाब से कराया। कल्लो से जब कई दौर की पूछताछ हुई तो उसने अपने सभी रिश्तेदारों, परिचितों के नाम बताए। मगर अपने सगे भाई पेशेवर चोर मुख्तार का कोई जिक्र नहीं किया। यहां तक कहा कि उसका कोई भाई ही नहीं है। मगर जब पुलिस को मुख्तार व शाइस्ता के रिश्ते की जानकारी हुई तो उससे मुख्तार को लेकर फिर से पूछताछ हुई। इस बार उसने मुख्तार को लेकर सीधा-सीधा जवाब दिया कि वह किसी को नहीं जानती और इस नाम का उसका कोई भाई नहीं।
इसके बाद पुलिस ने शाइस्ता के मोबाइल नंबर की मदद से मुख्तार का पीछा शुरू किया। सर्विलांस व मुखबिरी के आधार पर मुख्तार के साथी संतोष निवासी माबूद नगर देहली गेट मूल निवासी हरिदासपुर लोधा, इसी गांव का किशोरी और नौमी सिंह निवासी नवीपुर खुर्द कोतवाली हाथरस दबोच लिए। इन तीनों ने पूछताछ में स्वीकारा कि मुख्तार निवासी आजाद नगर गली नंबर 6 क्वार्सी के साथ उन्होंने अधिवक्ता दंपति के घर लूट व हत्या को अंजाम दिया था। इस दौरान घर से 1.60 लाख रुपये नगद, सोने-चांदी के जेवरात, मोबाइल, तीन विदेशी घड़ियां आदि माल लूटकर ले जाना स्वीकारा। इसके बाद शाइस्ता को गिरफ्तार किया और जब पुलिस ने सख्ती से पूछताछ शुरू की तो वह भी टूट गई और उसने लालच में कराई इस घटना में अपनी संलिप्तता स्वीकारी।
बदमाशों ने स्वीकारा कि वह सभी विभिन्न मुकदमों में जेल में रहे हैं। मुख्तार से वहीं दोस्ती हुई। मुख्तार की मदद से लूटा गया जेवरात हाथरस के कस्बा सादाबाद में सर्राफ ललित उर्फ ललितेश की दुकान पर बेचा है। ललित मूल रूप से दादों कस्बे का रहने वाला है। इनके पास से लूटी गई 1.40 लाख नगदी, तीन विदेशी घड़ियां व मोबाइल फोन बरामद हुआ है। अब पुलिस मुख्तार व ललित उर्फ ललितेश की तलाश में लगी है। जिनसे जेवरात मिलने की उम्मीद है। एसएसपी ने बताया कि डीआईजी ने टीम को 12 हजार व उनके स्तर से पांच हजार के इनाम की घोषणा की गई है। इस मौके पर एसपी सिटी अतुल श्रीवास्तव भी मौजूद रहे।
मिला तो लुटवा दिया ‘आशियाना’
अलीगढ़। अधिवक्ता दंपति के कत्ल को लेकर पुलिस, परिवार और पड़ोसी पहले ही दिन से शाइस्ता और उसके पति पर शक जता रहे थे। यही सच भी निकला। जब सच सामने आया तो सभी के मुंह से एक ही बात निकली कि जिसे बीस साल बेटी की तरह पाला, उसने लालच में अपनों का कत्ल कराते हुए अपना ही ‘आशियाना’ लुटवा दिया।
एसएसपी लव कुमार के अनुसार शाइस्ता ने पूछताछ में जो स्वीकारा है उसके अनुसार शादी के बाद उसके पति शादाब ने अधिवक्ता दंपति के सामने मकान के ऊपरी हिस्से में रहने का प्रस्ताव रखा था। मगर यह प्रस्ताव वकील साहब ने ठुकरा दिया था। बस इसी बात पर शाइस्ता गुस्से में आ गई और उसने अपने सगे भाई मुख्तार को बुलवाया और उसे बताया कि घर में 10-12 लाख का गहना मिल सकता है। इसी लालच में मुख्तार ने अपने साथियों की मदद की।
सर्विलांस ने भी जोड़ी कड़ियां
बेशक शाइस्ता यह कहती रही कि उसका कोई भाई नहीं है, मगर जांच में पता चला कि पहले पिता से शाइस्ता से बड़ा एक भाई भी है, जो अपराधी होने के कारण मां से अलग रहता है। जब सर्विलांस का सहारा लिया गया तो शाइस्ता व मुख्तार की घटना वाले दिन को छोड़कर उससे पहले हर दिन घंटों बातें हुई हैं।
अब कौन होगा संपत्ति का वारिस
नि:संतान दंपति की संपत्ति का वारिस कौन होगा, यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। हालांकि कुछ दस्तावेज, वसियत आदि भी घर में मिली है, जिनके अध्ययन व जांच के बाद साफ हो जाएगा कि कौन वारिस होगा।
16 साल में संतोष ने की सैकड़ों चोरियां
इस गैंग में एसओजी ने एक ऐसे शातिर चोर को भी गिरफ्तार किया है, जो 16 साल से चोरी कर रहा है। पकड़ा गया संतोष पूरे प्रदेश व आसपास के राज्यों में कितनी चोरियां कर चुका है। उसे खुद अंदाजा नहीं है। हां, इतना जरूर स्वीकारा है कि जेल से बाहर रहने के दौरान एक दिन छोड़कर हर दूसरे दिन वह चोरी की वारदात को अंजाम देता है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि अगर साल में 365 दिन बाहर रहे तो वह 182 दिन चोरी करता होगा। उसके साथ हाथरस निवासी नौमी भी हाथरस के दाल मिलों में छोटी-मोटी चोरियां किया करता था। जेल में रहने के दौरान उनका गैंग बना।
घटना के बाद कर रहे थे पार्टियां
इस घटना के बाद पुलिस उनके पीछे थी, मगर उन्हें भरोसा था कि ऐसा कोई साक्ष्य नहीं छोड़ा, जिससे पकड़े जा सकें। वह हर रोज पार्टियां कर रहे थे। पुलिस पीछे थी और संतोष की बेटी के जन्म दिन से लेकर हर रोज पार्टी हुई। इस दौरान मुख्तार उनके साथ रहा। मगर जब पुलिस पहुंची तो वह बचकर निकल गया।
खुलासे में यह टीम रही शामिल
इनाम की घोषणा उस पूरी टीम के लिए की गई है जो टीम इस खुलासे में शामिल रही है। इसमें इंस्पेक्टर सिविल लाइंस सूर्यकांत द्विवेदी, एसएसआई अजीत सिंह, एसओजी से रवि त्यागी, सर्विलांस धर्मेंद्र कुमार, एसआई इसरार अहमद, एएसआई राकेश यादव, जहीर हुसैन, एमपी सिंह, ऋषिपाल, मोहनलाल, सुभाष यादव व सुखवीर सिंह हैं।