फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Aligarh News: तट है सपाट, 75 वर्ष में नहीं बना एक भी घाट

Tue, 30 May 2023 01:37 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

शासन ने जिले में गंगा के तट पर पक्के घाट के लिए प्रशासन से प्रस्ताव भी मांगा था, लेकिन सांकरा की जगह प्रशासन ने दो किलोमीटर दूर सीकरी गांव में गंगा किनारे पक्के घाट के निर्माण के लिए सर्वे शुरू कराया तो सांकरा गंगाघाट पर्यटन विकास सेवा समिति सहित सांकरा के आश्रम में रहने वाले साधु-संत, स्थानीय ग्रामीण विरोध में उतर आए।
विज्ञापन
गंगा घाट प्रतीकात्मक - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

गंगोत्री से गंगासागर तक बह रही गंगा नदी जनपद के सोलह गांवों के किनारे सपाट तट से होकर निकल रही है। शताब्दियों से जनपद में जिस तट पर श्रद्धालु गंगा नदी में स्नान करते आ रहे हैं, उसे सांकरा घाट के नाम से तो लोग जानते हैं, लेकिन घाट के नाम पर एक सीढ़ी की नींव तक कभी नहीं रखी गई।

विज्ञापन


दादों क्षेत्र के गांव दीनापुर, बबरोतिया, हमीदपुर, रुस्तमनगर, सांकरा, गोपालपुर, सीकरी, किरतोली, नगला बगिया, हरनपुर कला, गेहतौली सहित सोलह गांवों के किनारे से होकर गंगा नदी बह रही है। वर्ष 2021-22 में भाजपा की ओर से निकाली गई नमामि गंगे यात्रा के दौरान प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री संदीप सिंह, उनके पिता एटा सांसद राजवीर सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधि, प्रशासन के उच्चाधिकारी सांकरा पहुंचे थे। सांकरा सहित गंगा के किनारे वाले गांवों मेें गंगा आरती के आयोजन हुए थे। सांकरा में मां गंगा की मूर्ति की स्थापना हुई थी। उस समय भी सांकरा में गंगा के तट पर पक्के घाट के निर्माण की जोर-शोर से मांग उठी थी। शासन और प्रशासन के प्रतिनिधियों ने आश्वासन भी दिए थे।

शासन ने जिले में गंगा के तट पर पक्के घाट के लिए प्रशासन से प्रस्ताव भी मांगा था, लेकिन सांकरा की जगह प्रशासन ने दो किलोमीटर दूर सीकरी गांव में गंगा किनारे पक्के घाट के निर्माण के लिए सर्वे शुरू कराया तो सांकरा गंगाघाट पर्यटन विकास सेवा समिति सहित सांकरा के आश्रम में रहने वाले साधु-संत, स्थानीय ग्रामीण विरोध में उतर आए। यह सभी प्राचीन काल से सांकरा में ही स्नान की आस्था जुड़ी होने की दुहाई देते हुए वहीं पर पक्के घाट के निर्माण की मांग कर रहे हैं। इस विरोध की वजह से सीकरी में भी पक्के घाट के निर्माण का प्रस्ताव लटक गया।
विज्ञापन


प्रमुख पर्व जब सांकरा में स्नान के लिए उमड़ते श्रद्धालु
गंगा दशहरा, कार्तिक पूर्णिमा, सोमवती अमावस्या, सावन माह का प्रत्येक सोमवार, प्रत्येक माह की पूर्णिमा, महाशिवरात्रि, गंगा सप्तमी। इसके साथ ही प्रत्येक रविवार को श्रद्धालु स्नान करने पहुंचते हैं। यहां पर जनपद के साथ ही कासगंज, हाथरस, राजस्थान से भी श्रद्धालु गंगा स्नान करने आते हैं।

गंगा में 51 और यमुना में 60 घंटे में आता है पानी
अलीगढ़। अधिशासी अभियंता सिंचाई भरत राम ने बताया कि अतरौली में गंगा एवं खैर में यमुना नदी में बाढ़ की संभावना रहती है। गंगा में आई बाढ़ से अतरौली में 16 ग्रामों में 19437 आबादी एवं 4495 हेक्टेयर क्षेत्रफल कृषि भूमि प्रभावित होती है। खैर में सात ग्रामों में 3070 आबादी के साथ ही 3032 हेक्टेयर भूमि जलमग्न हो जाती है। गंगा नदी में भीमगौड़ा बैराज हरिद्वार से छोड़े गए पानी को नरौरा बैराज पहुंचने में 51 घंटे का समय लगता है। वहीं यमुना नदी में हथिनीकुंड बैराज यमुना नगर (हरियाणा) से छोड़े गए पानी को अलीगढ़ पहुंचने में 60 घंटे लगते हैं। अभी से इससे निपटने के इंतजाम किए जा रहे हैं।

लोगों की अपनी बात
सांकरा के प्राचीन गंगा तट पर साधु-संतों की समाधियां बनी हैं। इस प्राचीन तट से सभी की आस्थाएं जुड़ी हैं। इसी जगह पर गंगा नदी के किनारे पक्का घाट बने। -संत धर्मगिरी महाराज, दुर्गादास आश्रम, सांकरा।
पांच वर्ष की अवस्था में सांकरा में गंगा किनारे मेरा मुुंडन हुआ था। तब यहां तक पहुंचने के लिए कच्ची पगडंडी थी। सारे क्षेत्र की आस्था सांकरा के तट से जुड़ी है। यहीं पर पक्का घाट बने। - सत्य प्रकाश शर्मा, बाढौल।
अपने बाबा उम्मेद सिंह के साथ पांच वर्ष की उम्र में पहली बार सांकरा के तट पर आया था। उस समय सांकरा से गंगा नदी के तट तक एक पगडंडी थी। यहीं पर हम सभी नहाते आ रहे हैं। यहीं घाट बने। -बीरबल सिंह, गोवला।
सांकरा में पक्के घाट सहित 51 मांगों को लेकर 2012 से लगातार संघर्ष जारी है। प्राचीन तट से सभी की आस्था जुड़ी है। यहां छोड़कर अन्य स्थान पर पक्के घाट का निर्माण स्वीकार नहीं है। - विनय यादव, संस्थापक, सांकरा गंगाघाट पर्यटन विकास सेवा समिति रजिस्टर्ड।

राजा शंकर सिंह के किले से नाम पर पड़ा सांकरा
प्राचीन कहानी है कि सांकरा में गंगा नदी का तट आस्था व प्राकृतिक सौंदर्य से भरा है। इसी से प्रभावित होकर राजा शंकर सिंह ने यहां गंगा नदी के तट पर ककई ईंटों से राजस्थानी शैली में एक किले का निर्माण कराया था। इसी किले के नाम पर इस स्थान का नाम सांकरा पड़ा।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें