किसी भी शहर की सुंदरता और प्रदूषण मानक को बिगाड़ने में पॉलीथिन की महत्वपूर्ण भूमिका है। कहने को वर्ष 2018 से पॉलीथिन पर प्रतिबंध का कानून है, बावजूद इसके धड़ल्ले से पॉलीथिन का निर्माण और उपयोग होता आ रहा है। शहर में हर दिन नगर निगम 36 टन पॉलीथिन कूड़े से एकत्रित कर रहा है, मगर एक जुलाई से पॉलीथिन के कैरीबैग समेत दैनिक उपयोग में लाए जा रहे प्लास्टिक के 19 उत्पादों पर पूरी तरह प्रतिबंध की कवायद शुरू होने जा रही है।
इसके लिए 3 जुलाई तक जागरुकता अभियान चलेगा। वास्तव में पॉलीथिन पर पूर्णत: प्रतिबंध लगा तोे शहर की तस्वीर बदल जाएगी। हालांकि अपने गोदामों में पॉलीथिन समेत प्लास्टिक उत्पादों वाला टनों माल दबाए बैठे व्यापारी इस कानून को ‘बड़ी आफत’ के रूप में देख रहे हैं।
केंद्र सरकार ने प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन संशोधन नियम 2021 के तहत 75 माइक्रोन से कम क्षमता वाली पॉलीथिन के कैरीबैग समेत 19 ऐसे दैनिक उपयोग के उत्पाद हैं, जिन पर पूर्णत: प्रतिबंध की बात कही है। नए नियम के लागू होने के साथ इनका उपयोग, उत्पादन व भंडारण कहीं पाए जाने पर पहली बार में कानूनी कार्रवाई के तहत सजा होगी। लोगों को यही समझाने के लिए बुधवार से 3 जुलाई तक जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है। बुधवार को अभियान की लांचिंग, शपथ व कूड़ा एकत्रीकरण का काम हुआ। 30 जून से 2 जुलाई तक कार्यशाला ड्राइव जगह-जगह चलाने का निर्देश है। 3 जुलाई को समारोह आयोजित कर लोगों से पॉलीथिन समेत प्लास्टिक के प्रतिबंधित सभी उत्पादों का उपयोग न करने में सहयोग मांगा जाएगा।
2018 में लगा था 40 माइक्रोन तक प्रतिबंध
प्रदेश सरकार ने वर्ष 2018 में 40 माइक्रोन से कम क्षमता वाली पॉलीथिन पर प्रतिबंध लगाया था। उस समय शहर में संचालित तीन कैरीबैग निर्माता फैक्टरियों को उद्योग व प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने बंद करा दिया था। इसके बाद कागजों में तो इस तरह की कोई फैक्टरी नहीं चली, मगर चोरी छिपे शहर में इसके उत्पादन की बात कोई नहीं नकार रहा।
दिल्ली और गाजियाबाद से हर दिन टनों आपूर्ति
सब्जी मंडी में प्लास्टिक पैकेजिंग के थोक विक्रेता बॉबी बताते हैं कि तीन साल पहले तक शहर में ही इसका निर्माण होता था। अब कहीं चोरी छिपे हो रहा हो तो नहीं कहा जा सकता। हां, प्लास्टिक के जिन 19 उत्पादों को प्रतिबंधित किया गया है, उसकी टनों आपूर्ति दिल्ली व गाजियाबाद से शहर में हो रही है। वह बताते हैं कि दिल्ली से माल लाने वाले एजेंटों में सर्वाधिक संख्या इस उत्पाद से जुड़े एजेंटों की है। वह यहां से आर्डर लेकर जाते हैं और दिल्ली, गाजियाबाद से बुकिंग पर माल मंगाते हैं।
तस्वीर साफ नहीं, हम सहयोग के लिए तैयार : राकेश गुप्ता
तालानगरी में हार्डवेयर प्लास्टिक पैकेजिंग निर्माता व एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश गुप्ता कहते हैं कि शहर में चोरी-छिपे कोई निर्माण कर रहा हो, इसकी जानकारी नहीं। मगर अब बाहर से ही माल मंगाया जाता है। जिले में इस उत्पाद की हर दिन काफी खपत है। इसके प्रतिबंध को लेकर दो दिन पहले जिलाधिकारी के साथ बैठक हुई थी। व्यापारी सहयोग देने के लिए तैयार हैं, मगर तस्वीर साफ होनी चाहिए कि कौन-कौन से उत्पाद बंद होंगे। अलीगढ़ में हार्डवेयर पैकेजिंग में भी प्लास्टिक का काफी मात्रा में उपयोग होता है। अध्यादेश में कहीं भी पैकेजिंग पर प्रतिबंध नहीं है, इसलिए व्यापारी भ्रमित भी हैं। हमने स्वयं इसी भ्रम में अपने यहां निर्माण रोक रखा है।
जिले में हर दिन 50 टन पॉली उत्पाद के उपयोग का अनुमान
इस कारोबार को लेकर सीधे तौर पर कोई अनुमानित आंकड़ा तो नहीं है, मगर जानकार व्यापारी व कारोबारी मानकर चल रहे हैं कि सब्जी, मिठाई, फल, पैकेजिंग के अलावा अन्य तरह के उपयोग में 50 टन के करीब प्रतिबंधित किए गए प्लास्टिक उत्पादों का उपयोग हो रहा है। इसकी कीमत लाखों रुपये में आंकी जा रही है।
-19 तरह के पॉलीथिन उत्पाद पूरी तरह प्रतिबंधित होने हैं। इसमें यूपी सरकार के 2018 के नियमानुसार 50 माइक्रोन से कम क्षमता वाले कैरीबैग भी शामिल हैं। इसके अलावा 75 माइक्रोन से कम क्षमता वाले कैरीबैग पर माइक्रोन न अंकित होना भी नियम विरुद्ध माना जाएगा। जनपद में इनके निर्माण की कोई भी इकाई फिलहाल संचालित नहीं है। दिसंबर 2022 में 120 माइक्रोन से कम क्षमता के कैरीबैग प्रतिबंधित हो जाएंगे। -जेपी सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।
नगर निगम से लेकर नगर पंचायत तक दिए गए रुपये
प्रदेश सरकार ने 29 जून से 3 जुलाई तक प्रतिबंधित प्लास्टिक उत्पादों के बारे में जागरुकता अभियान चलाने के लिए 13 लाख रुपये का बजट जारी किया है। इसमें 3 लाख रुपये अलीगढ़ नगर निगम को, एक-एक लाख रुपये अतरौली व खैर नगर पालिका को, इसके अलावा 50-50 हजार रुपये बेसवां, छर्रा, हरदुआगंज, इगलास, जलाली, जट्टारी, कौड़ियागंज, पिलखना, विजयगढ़, चंडौस, मडराक, पिसावा, बरौली, गभाना, जवां व टप्पल नगर पंचायत को जारी किए हैं। इसमें हर दिन कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को जागरुक करना है।
कैरीबैग समेत यह 19 उत्पाद किए गए प्रतिबंधित
-50 माइक्रोन से कम क्षमता के सभी प्रकार के प्लास्टिक कैरी बैग, 75 माइक्रोन से कम क्षमता पर बिना माइक्रोन अंकित कैरी बैग, ईयर-बड की प्लास्टिक डंडी, बैलून की प्लास्टिक डंडी, कैंडी में लगी प्लास्टिक की डंडी, आइसक्रीम की डंडी, पॉलीस्ट्राइनरीन थर्माकोल का सजावट में उपयोग का सामान, प्लास्टिक/थर्माकोल के प्लेट, कप, गिलास, कटलरी के सामान कांटा चम्मच, छुरी, स्ट्रा, ट्रे, मिठाई के डिब्बे को लपेटने की पतली प्लास्टिक सीट, आमंत्रण पत्र, सिगरेट के पैकेट की पैकेजिंग, 100 माइक्रोन से कम पीवीसी के बैनर, स्ट्रर आदि।