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शहर की हवा प्रदूषित... कोरोना ने और बढ़ा दी मुश्किल

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कौशल कुमार ओझा, अलीगढ़।
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जब तक सांस है, तब तक आस है। सांस के लिए हमारे फेफड़ों का स्वस्थ होना जरूरी है। कोरोना काल में सबसे अधिक फेफड़ों पर ही वायरस का हमला हो रहा है। पहले से ही प्रदूषित वातावरण की वजह से फेफड़े एवं सांस से संबंधित रोगियों की मुश्किलेें और बढ़ गई हैं।
परिवेशीय वायु गुणवत्ता अनुश्रवण केंद्र, सर सैयद में 31 मार्च 2021 को पीएम 10, 197 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रिकार्ड किया गया है। जबकि मार्च महीने का औसत 168 है। मानक के हिसाब से पीएम 10 अधिकतम सौ से अधिक नहीं होना चाहिए। महानगर के औद्योगिक, वाणिज्यिक एवं आवासीय क्षेत्रों में भी वायु प्रदूषण की स्थिति अच्छी नहीं है।
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यहां का व्यापक पर्यावरण प्रदूषण सूचकांक (सीईपीआई) संतोषजनक नहीं है। सीईपीआई वायु, जल और भूमि सहित पर्यावरण के विभिन्न स्तर का मापक है। यह मामला राष्ट्रीय हरित अभिकरण में भी गया था। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी रामगोपाल कहते हैं कि मार्च महीने में धूल एवं तेज हवा के कारण पीएम 10 अधिक रिकार्ड हुआ। उन्होंने बताया कि अप्रैल का डाटा अगले महीने आएगा।
सीधे फेफड़े पर अटैक
खतरनाक कोरोना वायरस सीधे फेफड़े पर अटैक कर रहा है। समय पर बेड, ऑक्सीजन, रेमडेसिविर इंजेक्शन और वेंटिलेटर आदि उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों की जान जा रही है।
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- कोरोना महामारी के समय में जिसके फेेफड़े पहले से खराब हैं, उनकी परेशानी बढ़ गई है। ऐसे में कोविड प्रोटोकॉल का सही तरीके से पालन कर ही इस बीमारी से बचा जा सकता है। मास्क, दूरी एवं बार-बार हाथ धोते रहें। पूरी दुनिया में इस विषय पर अध्ययन होना बाकी है कि फेफड़ों पर कोरोना के अटैक के पीछे प्रदूषण कितना जिम्मेदार है। - डॉ. पवन वार्ष्णेय, टीबी एवं चेस्ट रोग विशेषज्ञ
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