इस्लाम में महिलाओं को सियासत करने की इजाजत नहीं है। ऐसी अफवाह उड़ाकर एएमयू छात्र संघ चुनाव में उपाध्यक्ष पद की प्रबल दावेदार कहकशां खानम को नुकसान पहुंचाने का षडयंत्र रचा गया। इसकी भनक जब कहकशां खानम के समर्थकों को लगी तो उन्होंने इस्लामी विद्वान से फोन पर बातचीत कर उसका ऑडियो सोशल मीडिया पर जारी कर दिया। तब कहीं जाकर विरोधियों के मुंह पर ताला पड़ा।
छात्र संघ चुनाव के इतिहास में कहकशां खानम पहली महिला प्रत्याशी है, जो उपाध्यक्ष पद की दावेदारी ठोक रही हैं। यह भी सर्वविदित है कि एएमयू छात्र संघ के इतिहास में आज तक अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं सचिव पद पर किसी महिला प्रत्याशी को बैठने का मौका नहीं मिला है।
लेकिन कहकशां खानम के चुनावी जंग छेड़ने से इस बार लड़कियों ने भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया है। यह बदलाव भी एएमयू के लिए नया है। शुक्रवार से ही कैंपस में कुछ विरोधियों ने यह कहकर कहकशां खानम के दावेदारी को कमजोर करने का प्रयास किया कि इस्लाम में महिलाओं को सियासत करने की इजाजत नहीं है।
उन्होंने धर्म एवं लिंग का हवाला देकर मतदाताओं को बहकाने की कोशिश की। इस पर कहकशां खानम की एक समर्थक छात्रा ने धर्मशास्त्र विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. मुफ्ती जाहिद ए खां को फोन कर अपनी समस्या बताई और पूछा कि क्या इस्लाम में महिलाओं को सियासत करने की इजाजत नहीं है।
हम लोग एएमयू छात्र संघ चुनाव में कहकशां खानम को वोट करना चाहते हैं, लेकिन लोग कहते हैं कि आप उन्हें कैसे वोट दे सकती हैं। डॉ. मुफ्ती जाहिद ने इस बात को नकारते हुए कहा कि आप जिसे चाहे वोट कर सकती हैं। मैने ऐसी दलील नहीं देखी कि महिलाएं सियासत नहीं कर सकती।
एएमयू के पूर्व कोर्ट सदस्य अकरबउल्ला ने कहा कि कुछ लोग धर्म एवं लिंग के नाम पर इस्लाम और एएमयू को बदनाम कर रहे है। ऐसे लोगों से सावधान रहने की आवश्यकता है।