आरक्षण से महिला वकील उत्साहित
सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्देश के बाद बार एसोसिएशन के चुनावों में पहली बार महिला अधिवक्ताओं के लिए आरक्षण लागू किया गया है। इस फैसले ने दशकों से उपेक्षित महसूस कर रहीं महिला वकीलों को मुख्यधारा की राजनीति और नेतृत्व में आने का सुनहरा अवसर दिया है।
बार एसोसिएशन की कार्यकारिणी के कुल 14 में से 30 प्रतिशत पद अब महिला अधिवक्ताओं के लिए आरक्षित होंगे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कोषाध्यक्ष का पद पूरी तरह से महिला उम्मीदवारों के लिए सुरक्षित रखा गया है। महिला वकीलों का मानना है कि अब तक उनके मुद्दों को कार्यकारिणी में उतनी प्राथमिकता नहीं मिलती थी, लेकिन अब सीधे प्रतिनिधित्व से उनकी आवाज मजबूती से बुलंद होगी।
इस कदम का स्वागत करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता झरना चटर्जी, रिचा गुप्ता, बीनू गुप्ता, और दीप्ति जादौन ने कहा कि यह निर्णय न केवल लैंगिक समानता की जीत है, बल्कि कार्यस्थल पर महिलाओं की गरिमा बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम है। हर्षिता सिंह जादौन, अनुपम, पिंकी शर्मा और विमलेश कश्यप ने संयुक्त रूप से कहा कि प्रतिनिधित्व मिलने के बाद परिसर में महिलाओं के लिए बुनियादी सुविधाओं की कमी को दूर किया जाएगा।
एजेंडे में कॉमन रूम और प्रसाधन की समस्या
महिला अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया कि चुनाव जीतकर आने के बाद उनकी पहली प्राथमिकता कोर्ट परिसर में महिलाओं के लिए स्वच्छ प्रसाधन और एक सर्वसुविधायुक्त 'कॉमन रूम' का निर्माण करवाना होगा। कई साल से ये समस्याएं लंबित थीं, लेकिन अब सत्ता में भागीदारी मिलने से इनका समाधान संभव हो सकेगा।