जिला मुख्यालय से करीब 35 किमी दूरी पर स्थित विजयगढ़ का ऐतिहासिक किला आज खंडहर हालत में पहुंच गया है। पुंडीर वंश का यह किला इतना मजबूत था कि आसपास उसकी ख्याति थी, लेकिन आज इस किले के खंडहर में तब्दील होने की स्थिति में स्थानीय निवासियों ने इसको संरक्षित कर पुरातत्व महत्व का घोषित करने की मांग की है।
किले के इतिहास के बारे में लोग बताते हैं कि विजयगढ़ किले का निर्माण पुंडीर वंश के राजा डामर सिंह एवं उनके भाई विजय सिंह ने 16 वीं एवं 17 वीं शताब्दी के मध्य कराया था, जो बाद में गंभीरा किला के नाम से प्रसिद्ध हुआ। इतिहासकारों के अनुसार अकराबाद क्षेत्र के 64 गांव पर उनका शासन था। राजा विजय सिंह राजनीति और वास्तुकला में अत्यंत निपुण थे। उन्होंने किले को बहुत ही सुंदर तरीके से बनवाया और चारों ओर खाई का निर्माण कराया। किले के उत्तरी दिशा में बड़े तालाब का भी निर्माण कराया। पूर्व एवं पश्चिम दिशा में दो मजबूत दरवाजे थे। पश्चिमी दरवाजे के बाहर एक शिवालय का निर्माण कराया, जिसे वीरेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है। इसी तरह पूर्वी द्वार के बाहर देवी का मंदिर बनाया जो गंभीरा देवी के नाम से जाना जाता है। किले के मध्य अपने निवास के निकट अपनी कुलदेवी का मंदिर भी निर्मित कराया, जिसे नौचौकिया मंदिर के नाम से जाना जाता है। और आज भी दो दरवाजे टूटी-फूटी दीवारों को दर्शा रहे हैं। बताते हैं कि एक दरवाजे को हाथी दरवाजा कहा जाता था और वीरेश्वर महादेव मंदिर के पास स्थित दूसरे दरवाजे से होते हुए राजा महादेव की पूजा करने जाते थे। किले के ध्वस्त होने के बाद लोगों ने अपने नाम जमीन के पट्टे करा लिए और आज भी किसान किले की करीब 100 बीघा जमीन पर खेती कर रहे हैं।
बताते हैं कि जिस स्थान पर आज विजयगढ़ कस्बा है, वहां पर ढाक (पलाश) का वन क्षेत्र था, जिसे ढाका कहते थे। ढाका वन को हटाकर विजयगढ़ कस्बा बसाया गया। राजा विजय सिंह की मृत्यु के बाद 1716 ईसवीं में उनके पुत्र मान सिंह शासक बने। उन्होंने किले के निकट मानिकपुर गांव स्थापित किया। विजयगढ़ किले का यह इतिहास अलीगढ़ में सन 1909 में रहे तत्कालीन कलेक्टर एचआर नविल एवं प्रसिद्ध इतिहासकार जमाल मुहम्मद सिद्दीकी द्वारा हिस्टोरीकल सर्वे ऑफ अलीगढ़ डिस्ट्रिक्ट एवं इतिहास की अन्य पुस्तकों के आधार पर प्रस्तुत किया है। किले से संबंधित एक किवदंती समाज में विशेष रूप से प्रचलित है कि राजा विजय सिंह की तीन पुत्रियां थीं, जोकि गंभीरा, तलावर तथा सती के नाम से प्रसिद्ध हुईं। यह तीनों बेटियां सती हो गई थीं और उन्हीं के सती स्थान पर देवी मंदिर बनाए गए हैं। वीरेश्वर महादेव मंदिर पर पाली भाषा में दो शिलालेख अभी भी लगे हुए हैं। वह दर्शाते हैं कि यह शिला करीब 400 वर्ष पुरानी हैं। गम्भीरा मन्दिर पर हर सोमवार को मेला लगता है।
नगर पंचायत की सीमा विस्तार का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है, अगर वह मंजूर हो जाता है तो किला नगर पंचायत क्षेत्र में आ जाएगा और इसे संरक्षित करने का प्रयास किया जाएगा।-अनिल कुमार तिवारी उर्फ भोले जी,
नगर पंचायत अध्यक्ष
बुजुर्ग लोग बताते थे कि वीरेश्वर महादेव मंदिर किला के अंदर था। इसकी दीवारें करीब एक-एक मीटर की बनी हुई हैं और काफी जर्जर हो चुका था, लेकिन इसका जीर्णोद्धार विजयगढ़ निवासी वैद्य गोपाल शरण गर्ग ने फिलहाल में ही करवाया है। प्रत्येक सोमवार को यहां भक्त दर्शन करने के लिए आते हैं।-भूपेंद्र सिंह यादव उर्फ पप्पू, गंभीरा मंदिर के सेवक