नगर निगम के सीमा विस्तार पर विरोध के स्वर बेजां नहीं हैं। मंशा जो भी है, मगर सवाल खड़ा हो रहा है कि जो मोहल्ले या गांव शहर से सट गए। उन्हें छोड़कर सुदूर गांवों को नगर निगम में किस औचित्य के साथ शामिल किया गया है। इसी तर्क के साथ सपा पुरजोर विरोध की तैयारी में है और इस विषय को बहुत जल्द हाईकोर्ट में ले जाया गाएगा। अगर नगर निगम को केंद्र मानकर इस बार शामिल किए गए 16 गांवों की दूरी नापी जाए तो ये सभी 6 किमी से अधिक पर हैं। कई गांव तो 9 किमी दूरी तक पर बसा है। वहीं जो वंचित रह गए हैं, उनमें अधिकांश 5 किमी से कम दूरी पर हैं। कई मोहल्ले व गांव तो पुराने बाईपास पर बसे हैं, जिन्हें ये उम्मीद थी कि अबकी बार जरूर सीमा विस्तार पर नगर निगम का हिस्सा बन जाएंगे।
दूसरी बार भी सीमा विस्तार से वंचित रहे ये इलाके
यह पहला मौका नहीं है। वर्ष 2017 में 45 गांवों को नगर निगम सीमा में शामिल करने संबंधी प्रस्ताव तत्कालीन बरौली विधायक ठा.दलवीर सिंह की ओर से दिया गया था। उनके प्रयास से 19 गांवों नगर निगम सीमा में शामिल किए गए। हालांकि शामिल किए गए सभी 19 इलाके शहर के सहारे के थे। मगर कुछ इलाके उस बार रह गए। उन्हें तसल्ली दी गई कि आगे फिर प्रयास होगा। इस बार के प्रयास में भी ये इलाके नगर निगम में आने से वंचित रह गए हैं।
मेयर की दलील
मेयर मो.फुरकान कहते हैं कि मैं पहले दिन से 16 गांवों को शामिल करने का विरोध नहीं कर रहा। मगर सवाल एक ही है कि इतने करीब के इलाके क्यों छोड़ दिए गए। जब सीमा विस्तार किया ही गया तो इन इलाकों को भी वरीयता दी जानी चाहिए थी। हां, दूसरा विषय यह भी महत्वपूर्ण है कि पिछले बार शामिल 19 गांव अभी पूर्णत: नगर निगम विकसित नहीं करा पाया। फिर अब इतने दूर के गांवों को कैसे विकसित करा पाएगा। इस विषय पर मैंने मुख्यमंत्री से समय मांगा है। प्रयास किया जाएगा कि इन वंचित रहे इलाकों को शामिल कराया जाए।
सपा के तर्क
सपा के पूर्व महानगर अध्यक्ष अज्जू इशहाक, अब्दुल हमीद घोषी, मनोज यादव ने संयुक्त रूप से कहा है कि यह जानबूझकर तैयार कराया गया प्रस्ताव है। सोची समझी साजिश के तहत उन इलाकों को वंचित रखा गया, जहां भाजपा कमजोर है। जब 19 गांवों के चुनाव पिछले निकाय में नहीं हुए थे, तो इनमें कैसे करा दिए जाएंगे। जो इलाके पहले से शहर में लग गए हैं तो उन्हें वंचित कर दूर के इलाकों को क्यों वरीयता दी गई। इस सवाल का जवाब कोई नहीं दे रहा। हमारी पूरी तैयारी है। पहले ज्ञापन के जरिये चेतावनी दे दी गई है। अब हाईकोर्ट की तैयारी जारी है।
विधायक का पक्ष
नगर निगम सीमा विस्तार का प्रस्ताव रखने वाले कोल क्षेत्र के भाजपा विधायक अनिल पाराशर का कहना है कि हमने किसी दुर्भावना से काम नहीं किया। जो नाम हमारे पास आए, उन्हें प्रस्ताव में शामिल किया गया। भाजपा सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास की भावना से काम करती है। जो गांव या इलाके वंचित रह गए हैं। उनका प्रस्ताव प्रशासन के जरिये भिजवाया जाए। मैं खुद अपने स्तर से उन्हें नगर निगम में शामिल कराने का प्रयास करूंगा।
-6 किमी से अधिक दूरी पर बसे हैं शामिल सभी गांव
-6 किमी से कम दूरी पर वंचित रहे अधिकांश इलाके
शामिल किए गांवों की नगर निगम मुख्यालय से दूरी
-देवसैनी 7.8 किमी, तालसपुर कला 6.9 किमी, सुखरावली 6.8 किमी, सिंधौली 6.9 किमी, अलीनगर 6.5 किमी, भदेसी माफी 6.2 किमी, नगला पानखानी 7.4 किमी, पड़ियावली 7 किमी, रुस्तमपुर सकत खां (नगला मंदिर) 6.4 किमी, हाजीपुर चौहट्टा 6.3 किमी, बढ़ौली फतेह खां 7 किमी, दयानतपुर रसीला 9 किमी, भकरौला 6.4 किमी, दौलारा निरपाल 7.8 किमी, खेड़िया ख्वाजा बुद्धा 7.8 किमी, आसना अजीतपुर 8.7 किमी।
वंचित रहे गांवों की नगर निगम मुख्यालय से दूरी
-पटवारी का नगला 4.4 किमी, बिस्मिल्लाह कॉलोनी 2.1 किमी, रियाज कॉलोनी 5.5 किमी, वहीद नगर 5 किमी, सपना कॉलोनी 5 किमी, फोर्ट एन्क्लेव 3.9 किमी, फतेहनगर 5 किमी, नई आबादी चिलकौरा 6 किमी, उदला इलियास पुर 7.4 किमी, अल्हदादपुर नीवरी 7 किमी, तालसपुर खुर्द 7.5 किमी, शाहपुर कुतुब 7 किमी, महेशपुर 6 किमी, मंजूरगढ़ी 6 किमी, रामपुर पंजीपुर 6.5 किमी।
यह भी जानें:-
-नगला पटवारी, फोर्ट एन्कलेव, बिस्मिल्लाह कालोनी, रियाज कालोनी, वहीद नगर, सपना कालोनी, उदला इलियासपुर, नीवरी, तालसपुर खुर्द, महेशपुर आदि कुछ बस्तियां तो ऐसी हैं कि जो शहर के पुराने बाईपास पर बसी हैं और शहर में ही गिनी जाती हैं।