दो लाख के इनामी मुनीर से जुड़े मिशन इंपॉसिबल को पॉसिबल करने में दिन रात एक कर रहीं एजेंसियों के कान उस समय खड़े हो गए, जब अतीउल्ला को एसटीएफ नोएडा टीम ने दबोच लिया। पूछताछ में जो राज अतीउल्ला ने उगले, उसके बाद तो कई एजेंसियों ने उससे अलग-अलग पूछताछ की।
इस दौरान खुद उसने यह तो स्वीकारा कि मुनीर से नेपाल में मुलाकात हुई और उसे शरण भी दिलाई। मगर कब, इस सवाल पर वह टीमों को भटकाता रहा। साथ ही बड़ी खबर यह भी है कि इस दौरान उसने कश्मीरियों संग फरारी काटी है। इसलिए एजेंसियों के लिए बड़ा सवाल यह भी है कि कहीं कश्मीरियों के संपर्क में आकर देश विरोधी ताकतों से कनेक्शन तो नहीं जुड़ गए? कहीं मुनीर भी उनके संपर्क में आकर देश विरोधी ताकतों की शरण में तो नहीं चला गया?
एसटीएफ नोएडा यूनिट को जब खबर लगी कि अतीउल्ला नेपाल में है और अपने अलीगढ़ से जुड़े लोगों के संपर्क में है। इस पर एक टीम बनाकर उसकी रैकी के लिए नेपाल के पोखर में भेजी गई। इस दौरान पता चला कि वह अपने फुफेरे भाई संग काम कर रहा था। चूंकि नेपाल से गिरफ्तारी संभव नहीं थी। इसलिए लगातार उसका पीछा किया गया और उसे यहां आने पर मौका पाकर दबोचा गया। इस दौरान उसके रहने के ठिकाने के विषय में जानकारी हुई कि वह नेपाल में कश्मीरियों के साथ रह रहा था। जब एनआईए, दिल्ली स्पेशल सेल, एटीएस को भनक लगी तो सभी टीमों ने उससे पूछताछ की।
खुद एसएसपी एसटीएफ अमित पाठक स्वीकारते हैं कि उसने पूछताछ में यह स्वीकारा है कि नेपाल में मुनीर उससे मिला। दो-तीन दिन साथ रखने के बाद उसने उसे शरण भी दिलाई। मगर कब के सवाल पर वह कभी मार्च तो कभी अप्रैल का समय बताता है। यह अतीउल्ला द्वारा टीमों को भटकाने की बात है। मगर कुछ ऐसे क्लू मिले हैं, जिसके आधार पर हम आगे प्रयासरत हैं और उम्मीद है कि जल्द मुनीर की गिरफ्तारी भी संभव होगी।
फिर अलीगढ़ के जांबाजों ने बढ़ाया यूपी पुलिस का मान
प्रदेश में आतंक का पर्याय 2 लाख के इनामी मुनीर व उसके साथी शूटर 50 हजारी अतीउल्ला गैंग के पीछे देश की एनआईए, दिल्ली स्पेशल सेल, यूपी एसटीएफ, एटीएस, बिजनौर सहित पश्चिमी यूपी के कई जिलों की पुलिस थी। मगर खुद एसएसपी एसटीएफ अमित पाठक ने ऑपरेशन मुनीर के लिए लंबे समय तक एसओजी इंचार्ज रहे पिछले दिनों तक हाथरस में तैनात सब इंस्पेक्टर अजय कौशल, अलीगढ़ एसओजी में तैनात राकेश यादव, दुर्विजय सिंह, फिरोज खान को एसटीएफ से संबद्ध कराया। इन चारों ने मिलकर पिछले दिनों गिरफ्तार किए शादाब के अलावा मुनीर व अतीउल्ला का पीछा शुरू किया और शादाब को जेल भेजने के बाद अतीउल्ला को भी दबोच लिया।
बताया गया है कि जैसे ही अतीउल्ला की गिरफ्तारी की खबर फैली तो तमाम एजेंसियों ने इस टीम से उसे खुद को सौंपने की तमाम प्रयास किए। मगर टीम ने यूपी पुलिस का मान बढ़ाया। इस गिरफ्तारी में इन चारों के साथ-साथ एसटीएसफ के ही सचिन कुमार, साहब सिंह, बिजेंद्र, सुनील के अलावा निवर्तमान एसओ बन्नादेवी विनोद यादव आदि शामिल रहे हैं।
जरायम दुनिया ने इंजीनियर से बनाया बढ़ई
सऊदी में रहने वाले बाप के बेटे करीब 22 वर्षीय अतीउल्ला ने पूछताछ पर बताया कि उसका पड़ोसी जफरभाई कक्षा 6 के बाद उसे अलीगढ़ लाया और उसका दाखिला सातवीं में अब्दुल वसीर जूनियर हाईस्कूल में कराया। यहां गांव के ही जाहिद, साजिद भी आए और वह लोग पुरानी चुंगी पर रहने लगे। वर्ष 2011-12 में उसने एक निजी कॉलेज में डिप्लोमा इंजीनियरिंग में प्रवेश लिया। जहां उसकी मुलाकात तारिक आजमगढ़, शादाब से हुई।
मंजर के चुनाव में आलमगीर से झगड़े के बाद आशुतोष मिश्रा, मुनीर संग गैंग बनता चला गया। इस दौरान 2013 में वह जेल भी गया। इसी बीच आशुतोष व मुनीर एक स्थानीय भूमाफिया ग्रुप के संपर्क में आकर काम करने लगे। फिर मुड़कर नहीं देखा। फहद की हत्या के बाद भी अलीगढ़ में फरारी काटी। मगर आलमगीर हत्या के बाद उसने व मुनीर ने अलीगढ़ छोड़ दिया। पिछले एक साल से अपने रिश्ते के भाई कयामुद्दीन के पास नेपाल चला गया। जहां बढ़ईगिरी का काम शुरू कर दिया।
यह 11 मुकदमे दर्ज
वर्ष 2013 में सबसे पहले सिविल लाइंस में झगड़ा, फिर लूट, हमले का मुककदमा दर्ज हुआ। इसके बाद 2014 में धौंस वसूली के लिए मारपीट, पुरानी चुंगी पर हमला, धौंस वसूली, हमला, हत्या के बाद कुर्की का अनुपालन न करने का मुकदमा दर्ज हुआ। गिरफ्तारी के बाद 2016 में बुधवार को दो मुकदमे दर्ज हुए।