पूर्व सांसद राजवीर सिंह का कहना है कि इस विषय से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अवगत कराया गया था, उसके बाद ही मुख्य सचिव ने जांच के निर्देश दिए हैं। वहीं इस बड़े प्रोजेक्ट के जांच के घेरे में आने से विभाग में खलबली मच गई है।
अलीगढ़ जिले के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट रामघाट कल्याण मार्ग के चौड़ीकरण का निर्माण शुरू होने से पहले ही उसका 420 करोड़ का टेंडर सवालों के घेरे में आ गया है। मुख्य सचिव के आदेश पर कमिश्नर ने नगर आयुक्त की अध्यक्षता में एक जांच कमेटी बना दी है जिसे एक सप्ताह में अपनी रिपोर्ट देनी होगी। आरोप लगा है कि एक ही व्यक्ति द्वारा संचालित दो फर्मों को टेंडर दिए गए हैं, जिसमें विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत है।
विज्ञापन
क्वार्सी चौराहा से बुलंदशहर के नरौरा तक इस मार्ग का चौड़ीकरण कल्याण सिंह के देहांत के बाद तय हुआ था। उसी समय इस मार्ग का नाम रामघाट कल्याण मार्ग घोषित किया गया। तब से बने बजट प्रस्ताव, लेआउट आदि के बाद पिछले वित्तीय वर्ष में बजट स्वीकृति हुई। साथ में लोक निर्माण विभाग ने टेंडर प्रक्रिया भी पिछले दिनों पूरी की। जिसमें पहले चरण में 420 करोड़ से अधिक का टेंडर जारी किया। जिसे दो फर्मों को जारी किया गया है।
इस संबंध में पिछले दिनों पूर्व सांसद राजवीर सिंह राजू की ओर से मुख्य सचिव को शिकायत दी गई। शिकायत के अनुसार कहा गया कि इस टेंडर प्रक्रिया में पांच फर्मों की ओर से आवेदन किए गए। मगर उनमें से तीन फर्मों को बाहर कर दिया गया, जबकि एक ही पते की एक व्यक्ति द्वारा संचालित दो अलग अलग फर्मों को टेंडर जारी कर दिया गया। यह अफसरों की मिलीभगत से हुआ है।
विज्ञापन
इस शिकायत पर पिछले सप्ताह कमिश्नर संगीता सिंह को जांच कराने के निर्देश दिए गए। इसी निर्देश के क्रम में कमिश्नर की ओर से नगर आयुक्त की अध्यक्षता में जांच समिति बनाई है। जिसमें मुख्य विकास अधिकारी प्रखर कुमार सिंह, वरिष्ठ कोषाधिकारी योगेश कुमार व सेतु निगम के उप परियोजना प्रबंधक को शामिल किया गया है। कमिश्नर ने इस जांच समिति को एक सप्ताह में जांच रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं ताकि जांच रिपोर्ट से शासन को अवगत कराया जा सके।
पूर्व सांसद राजवीर सिंह का कहना है कि इस विषय से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अवगत कराया गया था, उसके बाद ही मुख्य सचिव ने जांच के निर्देश दिए हैं। वहीं इस बड़े प्रोजेक्ट के जांच के घेरे में आने से विभाग में खलबली मच गई है।