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Aligarh: ऑपरेशन के दौरान शिक्षिका की मौत पर हंगामा, शनिवार को बनाया रिजल्ट, बच्चों को था लौटने का इंतजार

Mon, 30 Mar 2026 12:08 PM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

अलीगढ़ पब्लिक स्कूल की अंग्रेजी की शिक्षिका शाइस्ता इश्तियाक ने 28 मार्च को पूरी लगन के साथ विद्यार्थियों के रिपोर्ट कार्ड तैयार किए थे। वह अक्सर कहती थीं कि पित्ताशय की पथरी का ऑपरेशन हो जाएगा और जल्द ही फिर से कक्षा में लौटकर बच्चों को पढ़ाएंगी, लेकिन किसे पता था कि यह इंतजार अधूरा रह जाएगा।
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शिक्षिका शाइस्ता इश्तियाक - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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अलीगढ़ शहर के धौर्रा स्थित एसआईजी हॉस्पिटल में पित्ताशय (गॉल ब्लैडर) के ऑपरेशन के दौरान शिक्षिका शाइस्ता इश्तियाक की मौत हो गई। शिक्षिका की मौत पर परिजनों ने हंगामा काटा और ऑपरेशन में लापरवाही का आरोप लगाया। परिजनों ने हॉस्पिटल के डॉक्टरों के खिलाफ थाना क्वार्सी में तहरीर दी है।

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ऊपरकोट निवासी सैयद अमजद अली की पत्नी और अलीगढ़ पब्लिक स्कूल की शिक्षिका शाइस्ता के पित्ताशय में पथरी थी, जिनका ऑपरेशन होना था। 29  मार्च की सुबह 9:30 बजे परिजन उन्हें एसआईजी हॉस्पिटल ले आए। ऑपरेशन की तैयारी शुरू होने लगी। सुबह 11 बजे उन्हें एनेस्थीसिया (बेहोशी की दवा) दी गई। इसी दौरान उनकी हालत बिगड़ने लगी। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने का प्रयास भी किया, लेकिन उनकी मौत हो गई। इसके बाद परिजनों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। 

परिजन सैयद काशिफ अली ने बताया कि उनकी भाभी की मौत में डॉक्टरों की लापरवाही रही। परिजनों के साथ हॉस्पिटल के कर्मचारियों ने हाथापाई भी की। इस संबंध में हॉस्पिटल के संचालक प्रो. अमजद अली रिजवी ने बताया कि एनेस्थीसिया डोज देने के बाद मरीज के दिल की धड़कनें कम होने लगी, जिससे उनकी मौत हो गई। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने का पूरा प्रयास किया। मरीज के परिजनाें ने हंगामा करने के साथ कर्मचारियों के साथ मारपीट भी की। सीओ तृतीय सर्वम सिंह का कहना है कि जो तहरीर भेजी जा रही है, उसे जांच के लिए सीएमओ ऑफिस भेजा जाएगा। वहां से मिली रिपोर्ट के आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी।

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शनिवार को बनाया था रिपोर्ट कार्ड
अलीगढ़ पब्लिक स्कूल की अंग्रेजी की शिक्षिका शाइस्ता इश्तियाक अब इस दुनिया में नहीं रहीं, लेकिन उनकी यादें विद्यार्थियों और स्टाफ के दिल में हमेशा जिंदा रहेंगी। 28 मार्च को ही उन्होंने पूरी लगन के साथ विद्यार्थियों के रिपोर्ट कार्ड तैयार किए थे। अभिभावक-शिक्षक बैठक में भी सक्रिय रूप से शामिल हुईं, हर बच्चे की प्रगति पर विस्तार से बात की। किसी को यह अंदाजा भी नहीं था कि यह उनका आखिरी दिन होगा। 

पिछले 12 वर्षों से वह कक्षा छह से 10 तक के विद्यार्थियों को अंग्रेजी पढ़ा रही थीं। उनकी पढ़ाने की शैली और समझने का तरीका उन्हें एक आदर्श शिक्षिका बनाता था। वह अक्सर कहती थीं कि पित्ताशय की पथरी का ऑपरेशन हो जाएगा और जल्द ही फिर से कक्षा में लौटकर बच्चों को पढ़ाएंगी, लेकिन किसे पता था कि यह इंतजार अधूरा रह जाएगा। उनके दो बच्चे हैं। इसी साल बेटे ने 12वीं और बेटी ने 10वीं की परीक्षा दी है। स्कूल की डॉ. फातिमा जेहरा ने कहा कि शाइस्ता के निधन से न सिर्फ एक शिक्षिका, बल्कि एक सच्ची मार्गदर्शक और सहकर्मी का खोना है। स्कूल के हर कोने में उनकी कमी महसूस की जा रही है। शिक्षक-शिक्षिकाओं की आंखें नम हैं।
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