टप्पल में ढाई वर्षीय बच्ची की हत्या मामले में मजिस्ट्रेटी जांच के आखिरी दिन 11 लोगों ने बयान दर्ज कराए, लेकिन बच्ची के पिता अथवा किसी अन्य परिजन ने अपने बयान दर्ज कराने में रुचि नहीं ली। जिन लोगों ने अपने बयान दर्ज कराये हैं, उनके बयान भी मात्र पुलिस की कार्रवाई को सही ठहराने तक सीमित रहे। दूसरे पक्ष का बयान न आने के चलते जांच अधिकारी एवं एडीएम प्रशासन ने मजिस्ट्रेटी जांच की सीमा 29 जून तक बढ़ा दी है। यही नहीं पीड़ित पक्ष को भी नोटिस जारी कर बयान दर्ज कराने के लिए बुलाने की भी तैयारी है।
टप्पल में ढाई वर्षीय बच्ची की हत्या और उसके बाद हुए बवाल को देखते हुए जिलाधिकारी ने मजिस्ट्रेटी जांच बैठा दी थी। एडीएम प्रशासन को जांच अधिकारी नियुक्त करते हुए जन साधारण से घटना के संबंध में लिखित एवं मौखिक साक्ष्य देने के लिए 11 से 19 जून तक का समय नियत किया। पहले आठ दिन तो बयान दर्ज कराने कोई नहीं आया। आखिरी दिन बुधवार को 11 लोगों निराले खान, मतीन खां, हबीब, हाकमीन, हाजी छुट्टन खां, खेमचंद शर्मा, सोनू बालियान, कुलदीप शर्मा, प्रेमचंद शर्मा, सुभाष एवं सतीश ने मजिस्ट्रेट न्यायालय में बयान दर्ज कराए, लेकिन पीड़ित पक्ष की ओर से न मृत बच्ची के पिता और न ही परिजन अथवा किसी अन्य ने बयान दर्ज कराने में रुचि ली।
बयान दर्ज कराने वाले भी पुलिस की अब तक की कार्रवाई को ही सही ठहराने का प्रयास करते दिखाई दिए। हालांकि नाम न छापने की शर्त पर एक बुजुर्ग व्यक्ति ने मामले के आरोपियों को निर्दोष बताया तो एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि पहले दिन पीड़ित पक्ष थाने पहुंचा तो पुलिस ने सहयोगात्मक रवैया अपनाया। दूसरे दिन गुमशुदगी दर्ज कर बच्ची की तलाश भी शुरू कर दी, लेकिन जैसे ही पुलिस ने बच्ची की चाची को उठाया तो अगले ही दिन उसकी लाश बरामद हो गई।
हालांकि उस व्यक्ति ने किसी पर कोई आरोप तो नहीं लगाया, लेकिन उसका बयान चौंकाने वाला रहा। इस मामले में जांच अधिकारी एवं एडीएम प्रशासन कृष्ण लाल तिवारी ने बताया कि मात्र आरोपी पक्ष के लोगों के बयान आए हैं, लेकिन केवल पुलिस के पक्ष में। पीड़ित पक्ष की ओर से कोई नहीं आया है। मृत बच्ची के पिता को नोटिस जारी कर बुलाया जाएगा। पुलिस की जीडी भी मंगाकर उसका अध्ययन किया जाएगा। मामले की गंभीरता को देखते हुए मजिस्ट्रेटी जांच की अवधि 29 जून तक बढ़ाई जा रही है।