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यहां हड़ताल है कहीं और जाकर इलाज कराएं

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जेएन मेडिकल कॉलेज में आरडीए की हड़ताल के कारण इमरजेंसी ट्रामा सेंटर पर पसरा सन्नाटा। - फोटो : CITY OFFICE
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जेएन मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल (सामूहिक अवकाश) तीसरे दिन भी जारी है। इसकी वजह से इमरजेंसी सेवाएं बाधित हो गई हैं। अस्पताल में भर्ती एक मरीज की मौत हो गई। जबकि दर्जनों मरीजों को बिना उपचार दिए वापस लौटा दिया गया। इमरजेंसी पहुंचने वाले लोगों को सुरक्षाकर्मी ‘यहां हड़ताल है, कहीं और जाकर दिखाएं’ की बात कहकर गेट से ही लौटा देते हैं।
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जेएन मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी एवं ट्रॉमा सेंटर से बुधवार को उमरी के 35 वर्षीय अमर सिंह, जयगंज के 17 वर्षीय विनीत, डिबाई के 13 वर्षीय आनंद, कौड़ियागंज शाहगढ़ की रेखा कुमारी को बिना उपचार दिए वापस लौटा दिया गया। सभी बुखार से गंभीर रूप से पीड़ित थे। दुर्घटनाग्रस्त होकर पहुंचे उसहा फतहाबाद डिबाई के प्रधान 45 वर्षीय खुशहाल सिंह, कौड़ियागंज की 4 वर्षीय इकरा, डिबाई के 24 वर्षीय शाहरुख खान, बुलंदशहर सालाबाद के 5 वर्षीय इरफान, चकरा गांव कासगंज की 21 वर्षीय सुमन को भी इमरजेंसी में उपचार नहीं मिला।
प्रसव पीड़ा से तड़पती अतरौली की नगमा एवं हड्डी की दिक्कत से परेशान 60 वर्षीय अंगूरी देवी एवं उनके परिजन गम एवं गुस्सा के साथ जेएन मेडिकल से वापस हुए। रामनगर जमालपुर की रामश्री को परिजन बेहोशी की हालत में लेकर आए थे, लेकिन उनको भी बिना उपचार वापस लौटा दिया गया। 17 से लेकर 19 जून के बीच अस्पताल में करीब 10 से अधिक मरीजों की मौत हो चुकी है। अस्पताल में पहले से भर्ती एक मरीज की मृत्यु सुबह में हुई है। हालांकि चिकित्सक इन मौतों को हड़ताल से जोड़ कर नहीं देख रहे हैं।
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किस्मत ने दिया सत्यवती, आसिफ एवं जयवीर का साथ
हृदयरोग से पीड़ित बुलंदशहर की करीब 40 साल की सत्यवती सुबह में अस्पताल में पहुंचीं। इमरजेंसी गेट के अंदर पहुंचते ही सत्यवती के सीने में तेज दर्द होने लगा। उनके पिता घबरा गए। लोगों की भीड़ लग गई और हंगामा की स्थिति उत्पन्न हो गई। सुरक्षाकर्मियों की सूचना पर सीएमओ डॉ. एहतेशाम, डॉ. असद आदि तुरंत मरीज को लेकर इमरजेंसी में गए। ईसीजी आदि कर तुरंत उपचार शुरू कर दिया।
चिकित्सकों की सक्रियता से सत्यवती की सांसे लौट आईं। सत्यवती को तुरंत आईसीयू में भेज दिया गया। उनका उपचार चल रहा है। इसी तरह 10 साल के आसिफ को सिर में गंभीर चोट लगी थी। इमरजेंसी में उपचार कर वापस भेज दिया गया। बुलंदशहर के जयवीर पुत्र प्रीतम दुर्घटनाग्रस्त होकर पहुंचे थे। उनको उपचार दिया गया। जेएन मेडिकल कॉलेज के सीएमएस प्रो. एससी शर्मा ने बताया कि इमरजेंसी में करीब 50 लोगों को प्राथमिक उपचार दिया गया। सीएमएस प्रो. शर्मा ने बताया कि बुधवार को ओपीडी में 1700 मरीज देखे गए। 8-10 ऑपरेशन भी हुए।
एएमयूकर्मियों के लिए इमरजेंसी के खुले हैं दरवाजे
एएमयू के छात्र, शिक्षक और कर्मचारियों के लिए इमरजेंसी के दरवाजे खुले हैं। भले ही बाहर के गंभीर मरीजों को वापस लौटा दिया जा रहा हो, लेकिन एएमयू कर्मियों को पूरा उपचार दिया जा रहा है।
जब हड़ताल है तो क्यों रेफर होकर आ रहे मरीज
जेएन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में तीन दिन से गंभीर मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है। यह बात सभी जानते हैं। बावजूद इसके मलखान सिंह, दीनदयाल संयुक्त चिकित्सालय, हाथरस एवं बुलंदशहर आदि से मरीजों को जेएन मेडिकल कॉलेज भेजा जा रहा है। दूर-दूर से मरीज को लेकर पहुंचे तीमारदार मारे-मारे फिर रहे हैं। उन्हें फंसाकर निजी नर्सिंग होम में ले जाने के लिए दलालों की फौज खड़ी है। कई तीमारदार जानकारी के अभाव में उनके जाल में फंस रहे हैं। एएमयू प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग एवं जिला प्रशासन के साथ-साथ लोग सरकार को कोस रहे हैं।

जेएन मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर्स की हड़ताल के कारण उपचारधीन बालक को लेकर दिल्ली जाते परिजन।- फोटो : CITY OFFICE

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