सफेद दूध के काले कारोबार पर बुधवार को पुलिस और खाद्य सुरक्षा विभाग की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई की। चंडौस थाने के नवाबपुर गांव में तीन मकानों में चल रही इस फैक्ट्री से 700 किलो सिंथेटिक दूध के साथ तीन लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया, जबकि चार लोग भाग गए।
पुलिस को बड़ी मात्रा में रिफाइंड, सिंथेटिक क्रीम समेत अन्य सामान मिला है, जिससे 2000 लीटर नकली दूध (सिंथेटिक दूध) बनाया जाना था। दिल्ली रेलवे ट्रैक के सहारे की इस फैक्ट्री से आसपास की दूध डेयरी के साथ ही एनसीआर, दिल्ली में इस सिंथेटिक दूध की खपत की जा रही थी। सात लोगों के खिलाफ पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की है।
नवाबपुर गांव की घनी आबादी के बीच चंद्रवीर सिंह के मकान में चल रहे सफेद जहर के इस कारोबार की खबर किसी ने बुधवार सुबह सीओ गभाना एवं खाद्य सुरक्षा विभाग को दी। एसडीएम अनिल कुमार त्रिपाठी, सीओ अनिल कुमार, खाद्य निरीक्षक कृपाशंकर एवं राजीव कुमार, चंडौस कोतवाल राजीव यादव ने बुधवार सुबह छह बजे छापा मारा।
टीम ने गांव में सिंथेटिक दूध के तीन ठिकानों पर छापा मारकर गुलफाम व सुहेब पुत्रगण होशियार खां, रिजवान पुत्र मुबीन निवासी रामपुर शाहपुर को गिरफ्तार कर लिया। होशियार खां, चंद्रवीर सिंह और शिवदत्त समेत चार लोग भाग गए।
पुलिस की यह कार्रवाई करीब तीन घंटे तक चली। टीम ने छह सैंपल भरे हैं, जिनमें दो सिंथेटिक दूध, एक अपमिश्रण, एक दूध पाउडर, एक रिफाइंड, एक मिल्क क्रीम का है। पिछले पांच-छह साल में सिंथेटिक दूध का यह सबसे बड़ा रैकेट सामने आया है।
सिंथेटिक दूध के इस कारोबार के जानकार बताते हैं कि पांच गुना से ज्यादा का मुनाफा है। एक लीटर रिफाइंड (कीमत करीब 80 रुपये) और 10 रुपये का केमिकल मिश्रण करने के बाद करीब 12 लीटर दूध तैयार होता है। एक लीटर दूध की कीमत 40 रुपये है। करीब 7 रुपये की लागत में एक लीटर दूध तैयार हो जाता है। इस तरह 90 रुपये खर्च कर 480 रुपये कमाए जाते हैं।
चंडौस के सीएचसी अधीक्षक डा. विनीत सक्सेना का कहना है कि सिंथेटिक दूध से पेट की आंतें खराब होने की आशंका रहती है। कारण, इसमें रिफाइंड के साथ पाउडर, यूरिया, घातक केमिकल मिलाकर दूध तैयार होता है। अधिक समय तक सिंथेटिक दूध पीने से धीरे-धीरे कैंसर बन जाता है।