महानगर में खुल्लम-खुल्ला बिना पंजीकरण और बिना लाइफ सिक्योरिटी गार्ड संचालित स्वीमिंग पूल मौत का कारण बन रहे हैं। इसी कड़ी में शुक्रवार दोपहर दोस्तों संग तालसपुर इलाके के स्वीमिंग पूल में नहाने गए किशोर की डूबने से मौत हो गई। मौके पर मची चीख पुकार के बाद आनन-फानन किशोर के शव को स्वीमिंग पूल से बाहर निकाला गया और शव को घर पहुंचाया गया। जहां परिवार में कोहराम मच गया। खबर पर पुलिस भी पहुंच गई। बाद में परिवार द्वारा कोई कार्रवाई न किए जाने की बात लिखित में दिए जाने पर पुलिस ने पंचनामा भर शव परिवार को सौंप दिया।
वाकये के अनुसार अरमान (14) पुत्र राजू निवासी बाबू खां भुजपुरा चौक कोतवाली पांच भाई-बहनों में सबसे छोटा है। पिता की 8 साल पहले मौत होने के बाद सभी भाई पालिस कारखाने में नौकरी करते हैं। शुक्रवार को कारखाने में छुट्टी होने के कारण वह अपने दोस्तों संग तय प्रोग्राम के अनुसार स्वीमिंग पूल में नहाने गया था। यह लोग देहली गेट व कोतवाली के बॉर्डर पर पुराने बाईपास तालसपुर से आगे नीवरी की ओर फूल बगिया के पास बने नए स्वीमिंग पूल में नहाने पहुंचे। जहां दोपहर करीब 12 बजे डूबने से अरमान की मौत हो गई। दोस्तों के अनुसार वह पानी में जान बचाने के लिए हाथ पैर मारता रहा, मगर मौज मस्ती में उसके दोस्तों का ध्यान उस ओर नहीं गया।
वहीं काफी देर फड़फड़ाने के बाद उसने दम तोड़ दिया। जब दोस्तों ने उसे मृत अवस्था में देखा तो वह घबरा गये। दोस्तों ने परिजनों को इसकी सूचना दी। मौके पर पहुंचे परिजन अरमान को उपचार के लिए जिला अस्पताल भी लेकर गये, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। सूचना पर पहुंची कोतवाली पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम कराने के लिए कब्जे में ले लिया। लेकिन, बाद में परिजनों के अनुरोध व लिखित में दिए जाने पर पंचनामा भर उन्हें सौंप दिया। किशोर की मौत के बाद परिवार में मातम का माहौल है। इंस्पेक्टर कोतवाली राजीव सिरोही के अनुसार मामले में लिखित में मिलने के कारण कोई कार्रवाई नहीं की गई है। मगर स्वीमिंग पूल में सुरक्षा इंतजामों व पंजीयन आदि को लेकर जिला प्रशासन को रिपोर्ट भेजी जा रही है।
न पंजीकरण, न लाइफ सिक्योरिटी गार्ड, ये कैसे स्वीमिंग पूल
कहने को शहर के अंदर व बाहर अनगिनत स्वीमिंग पूल प्राइवेट स्तर पर चल रहे हैं। जिनमें आगरा रोड व बाईपास सहित शहर के बेगमबाग आदि इलाकों में स्वीमिंग पूल संचालित हैं। मगर इनके इंतजामों और पंजीकरण पर गौर करें तो नियमानुसार जिला मनोरंजन कर कार्यालय में कोई भी स्वीमिंग पूल पंजीकृत नहीं है। वहीं आम तौर पर स्वीमिंग पूल जाने वाले लोगों की जुबानी यह बात जगजाहिर है कि वहां न तो कोई प्रशिक्षित स्टाफ होता है और न कोई रोक-टोक करने वाला होता। न ही लाइफ सिक्योरिटी संबंधी स्टाफ होता है।
जिस स्वीमिंग पूल में यह घटना हुई है। वहां का आलम भी कुछ ऐसा ही है। पूर्व जिला मनोरंजन कर अधिकारी वर्तमान में जीएसटी अधिकारी सुरेंद्र सिंह के अनुसार जिले में हाल ही में जीएसटी में शामिल हुए मनोरंजन कर विभाग में एक भी स्वीमिंग पूल पंजीकृत नहीं है। फिर वह मानक कैसे पूरे कर रहा होगा, इसका अंदाजा खुद ही लाया जा सकता है।