लोधा पुलिस द्वारा जो सॉल्वर गैंग पकड़ा गया है, उसकी बात सुनकर एक बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है। आखिर सॉल्वर परीक्षा केंद्र के गेट पर प्रवेश के समय होने वाली चेकिंग में क्यों नहीं पकड़े गए। कहीं कोई मिलीभगत तो नहीं थी। बस अभ्यर्थी का पुराना फोटो और उसकी आईडी हाथ में लिए गेट पर पहुंचे सॉल्वर को जब चेकिंग में रोका तो उसने एक ही जवाब दिया कि यह उसका पुराना फोटो है। चेकिंग टीम उसके इस जवाब से संतुष्ट हुई और वह परीक्षा में शामिल हो गया। खुद पुलिस सवाल खड़ा कर रही है कि बिना मिलीभगत के कैसे संभव है।
ऐसे चलता है पूरा नेटवर्क
पकड़ा गया रघुवीर उर्फ रघु, सुंदर व सहयोगी राहुल पांडेय इस धंधे के मास्टर माइंड हैं। कई साल पहले से वे इस धंधे में हैं। कोचिंग सेंटरों में तैयारी करते और फिर उन्हीं में पढ़ते समय वे इस धंधे में उतरे। उन्होंने अलीगढ़, आगरा के अलावा दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, देहरादून, शिमला, राजस्थान, बिहार आदि जगहों पर नेटवर्क बना रखा है। कोचिंग सेंटर संचालकों की मदद से ये लोग ऐसे अभ्यर्थियों का डाटा एकत्रित करते हैं, जो सरकारी सेवाओं की परीक्षाओं में शामिल होने जा रहे हैं या तैयारी कर रहे हैं।
कोचिंगों की मदद से ही ये लोग नौकरी लगवाने या परीक्षा में पास कराने का सौदा करते हैं। नौकरी लगवाने का ठेका छह से सात लाख में और परीक्षा में पास कराने का ठेका एक से डेढ़ लाख में तय होता है। उससे ये उसका प्रवेश पत्र, आईडी प्रूफ, पुराने दो फोटो लेते हैं। चूंकि आईडी प्रूफ पर फोटो धुंधला होता है। साथ ही प्रवेश पत्र पर पुराना फोटो लगाकर उस पर फर्जीवाड़ा करते हैं और फिर उससे मिलती जुलती शक्ल के सॉल्वर को परीक्षा देने का काम सौंपा जाता है। जब वह अंदर जाता है तो फोटो पुराना बताकर प्रवेश पा जाता है। गैंग में ऐसे सॉल्वर हैं, जो लगातार तैयारी कर रहे हैं और महत्वपूर्ण परीक्षाएं दे चुके हैं। सॉल्वर को 50 हजार रुपये दिए जाते हैं।
पकड़े गए सॉल्वर राहुल का हो चुका है चयन
पकड़े गए सॉल्वर राहुल का सहायक सेनानायक के पद पर चयन हो चुका है। उसने परीक्षा पास की है। अब उसका इंटरव्यू आदि शेष रह गया है। इसके अलावा वे अब तक अपने लिए अनगिनत परीक्षाएं दे चुका है, जबकि सॉल्वर के रूप में भी तमाम परीक्षाएं दे चुका है।
ढाई माह हिमाचल जेल में रहा था सरगना रघु
पुलिस पूछताछ में सरगना रघु ने स्वीकारा कि वह कई साल से इस धंधे में है। वर्ष 2019 में हिमाचल में इसी तरह के धंधे में पकड़ा गया था और ढाई महीने जेल रहा।
गैंग का पूरा नेटवर्क खंगालने में लगी टीम
पुलिस जांच में सामने आया है कि यह लोग दूसरे राज्यों ऐसे रैकेट के संपर्क में रहते हैं। वहां का रैकेट इनके ग्राहकों के लिए उन राज्यों में सॉल्वर से परीक्षा दिलवाते हैं और दूसरे राज्यों के गैंग के लिए ये लोग यहां परीक्षा दिलवाते हैं। इनके पास से तमाम नंबर व आईडी प्रूफ मिले हैं, जिसे लेकर पूरा नेटवर्क खंगालने का काम चल रहा है। सभी को रडार पर लिया जाएगा।
महिला मित्र के खाते में जाता पूरा पैसा
रघु के अनुसार कोई अगर नौकरी लगवाने का ठेका देता है तो उसके लिए महकमों में कुछ लोग बैठे हैं, जिनकी मदद से ये काम कराया जाता है। वैसे उनका मूल काम सॉल्वर गैंग चलाना है। वह रकम तीन हिस्सों में बांटते हैं। एक हिस्सा सॉल्वर को, एक ग्राहक दिलाने वाले को और तीसरा खुद को। उसकी पूरी रकम उसकी हाथरस की रहने वाली महिला मित्र के खाते में जमा होती है और उसका एटीएम कार्ड रघु के पास रहता है, जो पुलिस ने बरामद किया है, जो कार बरामद हुई हैं, उनमें से एक पकड़े गए ग्राहक रविंद्र की है।
पुलिस को किया था 20 लाख का ऑफर
इस घटना में जब पुलिस सक्रिय हुई तो पुलिस के पास तरह-तरह के ऑफर इधर उधर से आए। शुरुआत में पांच लाख से ऑफर शुरू हुआ था और बाद में 20 लाख रुपये तक का ऑफर हुआ। मगर पुलिस ने सभी ऑफरों को ठुकरा दिया।