संविधान पीठ इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 2006 के फैसले से उत्पन्न एक मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें कहा गया था कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) अल्पसंख्यक संस्थान नहीं है। सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने वर्ष 2019 में इस मामले को सात जजों की संविधान पीठ के पास भेज दिया था।
मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला, न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता, न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की सात न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुनवाई पूरी कर 1 फरवरी 2024 को फैसला सुरक्षित रख लिया था।
एएमयू सर्किल पर फोर्स तैनात, अफसरों ने टटोली नब्ज
एएमयू के अल्पसंख्यक दर्जे पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट से आने वाले फैसले को लेकर 7 नवंबर को एएमयू सर्किल पर फोर्स तैनात कर दी गई। वहीं, अफसरों ने एएमयू इंतजामिया से हालात को लेकर नब्ज टटोली।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ 10 नवंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। सेवानिवृत्ति से पहले एएमयू अल्पसंख्यक स्वरूप बहाल समेत कई फैसले आने थे। इनमें कई फैसले आ चुके हैं। सिर्फ एएमयू अल्पसंख्यक दर्जे को लेकर इंतजार था, जो 8 नवंबर को खत्म हो रहा है। जैसे ही 8 नवंबर को फैसला आने का आदेश आया, वैसे ही सोशल मीडिया पर अल्पसंख्यक दर्जा बहाल रहेगा या नहीं, इसको लेकर चर्चाएं शुरू हो गईं। वहीं, 7 नवंबर को एएमयू सर्किल पर पीएसी के जवान तैनात कर दिए गए। जिला प्रशासन ने कुलपति, कुलसचिव से संवाद समन्वय बना रखा है।