एएमयू में कुल 20 आवासीय हॉल हैं। इनमें कुल करीब 19 हजार विद्यार्थी रहते हैं। इनको प्रतिदिन नाश्ता, दोपहर का खाना और रात का खाना दिया जाता है। प्रतिदिन एक बार के खाने में मीट रहता है। शुक्रवार को दोनों समय मीट दिया जाता है।
यह है एएमयू में मीट की खपत की स्थिति
एएमयू में एक दिन में 700 किलो मीट की खपत हो जाती है। शुक्रवार को दोनों समय मीट बनता है। इस तरह महीने में करीब 24 हजार किलो मीट की खपत हो जाती है। इसमें हफ्ते में दो दिन मुर्गे का मीट भी शामिल रहता है। अन्य दिनों मटन और भैंसा शामिल है।
सुलेमान हॉल से लिया मीट का नमूना जांच के लिए भेजा
बीफ पकाए जाने की शिकायत के बाद मामले की जांच के लिए पहुंची खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने वहां से नमूने भरे। टीम के साथ पशु पालन विभाग की टीम भी थी। पशु पालन विभाग की टीम ने भी नमूना लिया है। जो इस बात की जांच के लिए भेजा गया है कि पकाया गया मीट किस वंश के पशु का है।
एएमयू के आवासीय हॉल ही नहीं बल्कि यहां परिसर में चल रहे फूड एंड क्राफ्ट इंस्टीट्यूट में ही खाने की गुणवत्ता सवालों के घेरे में आई है। यहां पर भी जो फर्म सप्लाई कर रही है उस के पास भी लाइसेंस नहीं है। इसी के चलते यहां खाद्य सुरक्षा विभाग ने आठ खाद्य वस्तुओं के नमूने भरे हैं। इन नमूनों में स्ट्रॉबेरी केक विद एग, केक बेस विदआउट एग, चुकंदर का हलवा, इटेलियन पाश्ता, रिफाइंड सोयाबीन तेल, मैदा, चीनी और मक्के का आटा शामिल हैं। यहां पर 150 छात्र प्रशिक्षण पाते हैं। यह छात्र जो खाना बनाते हैं उसे स्वयं भी खाते हैं।
विभाग को फूड एंड क्राफ्ट इंस्टीट्यूट के संबंध में शिकायत प्राप्त हुई थी। जिसके बाद वहां पहुंच कर नमूने भरे गए हैं। इनको जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। यहां पर बिना लाइसेंस के ही खाद्य सामग्री की आपूर्ति की जा रही थी। अब जांच के बाद आपूर्ति कर्ता पर कार्रवाई की जाएगी। - दीनानाथ यादव, मंडलीय सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा।