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Aligarh News: घर, अस्पताल और पशुपालन से निकला ‘सुपरबग’ नालों में मिला

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जमालपुर नाले के किनारे रहने वाले लोग अक्सर गंदे पानी और बदबू की शिकायत करते हैं, लेकिन अब यही नाला एक और खामोश खतरे की वजह बनता दिख रहा है। यहां बह रहे सीवेज में ऐसे बैक्टीरिया पनप रहे हैं, जिन पर सबसे मजबूत एंटीबायोटिक दवाएं भी असर नहीं कर रहीं। यानी आने वाले समय में मामूली संक्रमण भी जानलेवा हो सकता है और यह खतरा हमारे आसपास, हमारी नजरों से दूर, तेजी से फैल रहा है।
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यह जानकारी अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के एक अध्ययन में सामने आई है जिसे अंतरराष्ट्रीय जर्नल स्प्रिंगर नेचर ने प्रकाशित किया है। इस अध्ययन में ऐसे बैक्टीरिया मिले हैं, जिन पर कार्बापेनेम जैसी आखिरी विकल्प मानी जाने वाली एंटीबायोटिक दवाएं भी बेअसर हो रही हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि सुपरबग नाले में पैदा नहीं होता, वहां तैयार होता है। अस्पतालों से निकलने वाला कचरा पहला स्त्रोत है। वहां एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल सबसे ज्यादा होता है।


इसलिए बैक्टीरिया के अस्पताल से सीवेज तक पहुंचने की आशंका सबसे ज्यादा रहती है। इनके अलावा, घरों से लोग बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक ले रहे हैं। अनजाने में कोर्स अधूरा छोड़ देते हैं। इन घरों से भी मल-मूत्र के जरिए बैक्टीरिया नालों में पहुंचते हैं। इसी तरह, दवा उद्योग और पशुपालन भी इसके स्त्रोत हैं। अलीगढ़ में पशुपालन सर्वाधिक है, इसलिए ये भी तीन प्रमुख स्त्रोत में शामिल है।
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पहली बार शहर में ऐसा अध्ययन
शोधकर्ताओं का दावा है कि अलीगढ़ में इस तरह का पहला अध्ययन हुआ है जिसमें जमालपुर नाला और जोफरी ड्रेन से 51 नमूने लेकर जांच की गई। इसमें ई. कोलाई और क्लेबसिएला न्यूमोनिया जैसे बैक्टीरिया पाए गए, जो इमिपेनेम और मेरोपेनेम जैसी शक्तिशाली एंटीबायोटिक दवाओं से भी नहीं मरे। इस जांच में ई. कोलाई का एक ऐसा स्ट्रेन भी मिला, जिसमें बीएलएएनडीएम-7 नाम का खतरनाक जीन मौजूद था।


यह वही जीन है, जो बैक्टीरिया को दवाओं के खिलाफ सुपरपावर देता है। शोधकर्ताओं के अनुसार यह खतरनाक जीन एक प्लाज्मिड पर मौजूद है। यह डीएनए का ऐसा छोटा हिस्सा है, जो एक बैक्टीरिया से दूसरे में आसानी से ट्रांसफर हो जाता है। यानी अगर एक बैक्टीरिया दवा से बचना सीख गया, तो वह सीख दूसरे बैक्टीरिया को भी दे सकता है। यही वजह है कि एंटीबायोटिक दवाएं धीरे-धीरे बेअसर होती जा रही हैं।

आम लोगों के लिए खतरा कितना बड़ा?
शोधकर्ताओं के अनुसार, सीवेज का पानी अक्सर खेती, जल स्रोतों या आसपास के इलाकों को प्रभावित करता है। ऐसे में दूषित पानी या भोजन के जरिए ये बैक्टीरिया इंसानों तक पहुंच सकते हैं। इसका मतलब है कि सामान्य संक्रमण का भी इलाज मुश्किल हो सकता है। अस्पतालों में इलाज लंबा और महंगा होगा। साथ ही, गंभीर मामलों में जान का खतरा भी बढ़ सकता है।

सीवेज ऐसे खतरनाक बैक्टीरिया का बड़ा ठिकाना बनते जा रहे हैं। अगर समय रहते निगरानी और रोकथाम नहीं की गई तो भविष्य में एंटीबायोटिक दवाएं कई संक्रमण पर पूरी तरह बेअसर हो सकती हैं। - प्रो. असद उल्ला खान, एएमयू
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बीमारी को समझें
ई. कोलाई: दूषित पानी या भोजन से शरीर में पहुंचता है। इसके खतरनाक रूप से दस्त, पेट दर्द, उल्टी और गंभीर मामलों में किडनी तक प्रभावित हो सकती है।
क्लेबसिएला न्यूमोनिया: फेफड़ों, मूत्र मार्ग और घावों में गंभीर संक्रमण पैदा कर सकता है, खासकर अस्पतालों में भर्ती मरीजों के लिए खतरनाक।
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